
जीवन के अंतिम पड़ाव में जब भागदौड़ कम हो जाती है, तब बुजुर्ग अक्सर अपनी पुरानी यादों में खो जाते हैं। ऐसे समय में संगीत उनके जीवन का अहम सहारा बन जाता है। पुराने और मधुर गीत उन्हें सुकून, शांति और भावनात्मक जुड़ाव का एहसास कराते हैं। यही वजह है कि बुजुर्गों की पसंद में अधिकतर वे गाने शामिल होते हैं, जो उन्हें उनके बीते दिनों की याद दिलाते हैं।
पुराने फिल्मी गीतों का अलग ही आकर्षण
अधिकांश बुजुर्ग 1950 से 1970 के दशक के रेट्रो बॉलीवुड गीतों को बेहद पसंद करते हैं। मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, लता मंगेशकर और आशा भोंसले की मधुर आवाज आज भी उनके दिलों में बसी हुई है। के. एल. सहगल के दौर के गीत भी उन्हें खास तौर पर पसंद आते हैं। इन गीतों की सरल धुन और अर्थपूर्ण बोल बुजुर्गों को गहरे भावनात्मक अनुभव से जोड़ते हैं।
भजन और भक्ति गीत देते हैं मानसिक शांति
सुबह और शाम के समय बुजुर्ग अक्सर भजन, कीर्तन और देवी-देवताओं के स्तुति गीत सुनना पसंद करते हैं। रामचरितमानस की चौपाइयां और भक्ति संगीत उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष प्रदान करते हैं। कई बार वे आंखें बंद कर इन गीतों में पूरी तरह खो जाते हैं।
गजल और सूफी संगीत भी है पसंद
वरिष्ठ नागरिकों को जगजीत सिंह, गुलाम अली, पंकज उधास और मेहदी हसन की गजलें भी बेहद पसंद आती हैं। गहरे अर्थ वाले बोल और धीमी, शांत धुन उनके मन को सुकून देती है। इसके अलावा क्षेत्रीय लोकगीत और विवाह गीत भी उनकी पसंद का हिस्सा होते हैं।
देशभक्ति गीतों से जागती है भावनाएं
‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ और ‘वंदे मातरम्’ जैसे पुराने देशभक्ति गीत बुजुर्गों के मन में गर्व और देशभक्ति की भावना जगाते हैं। ऐसे

