
दुनियाभर में करोड़ों लोग अपने दिन की शुरुआत चाय के साथ करते हैं। यही वजह है कि चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि लोगों की दिनचर्या और संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुकी है। पानी के बाद चाय दुनिया में सबसे अधिक पी जाने वाली पेय मानी जाती है। चाय की इसी लोकप्रियता और उसके सामाजिक तथा आर्थिक महत्व को देखते हुए हर साल 21 मई को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है।
इस खास दिन का उद्देश्य चाय उद्योग से जुड़े लोगों की मेहनत को सम्मान देना और चाय उत्पादन से जुड़े मजदूरों तथा छोटे उत्पादकों की समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाना है।
चाय से होती है दिन की शुरुआत
अधिकांश लोग सुबह उठते ही चाय पीना पसंद करते हैं। कई लोग नाश्ते से पहले हरी चाय का सेवन करते हैं, जबकि कुछ लोगों की सुबह बिना चाय के अधूरी मानी जाती है। समय के साथ चाय की कई किस्में भी लोकप्रिय हुई हैं।
आज लोगों के बीच हरी चाय, काली चाय, नींबू चाय, सफेद चाय और गुलाब चाय जैसी कई प्रकार की चाय पसंद की जाती हैं। स्वाद के साथ-साथ लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए भी अलग-अलग प्रकार की चाय का सेवन करते हैं।
कैसे हुई चाय की खोज
चाय का इतिहास लगभग पांच हजार वर्ष पुराना माना जाता है। इसकी शुरुआत चीन से हुई थी। मान्यता के अनुसार चीन के सम्राट शेन नुंग एक बार अपने सैनिकों के साथ पेड़ के नीचे बैठे हुए पानी उबाल रहे थे। तभी हवा के साथ कुछ चाय की पत्तियां उबलते पानी में गिर गईं।
कुछ देर बाद पानी का रंग बदल गया और उससे अच्छी खुशबू आने लगी। सम्राट ने जब उस पेय को पिया तो उसका स्वाद उन्हें बेहद पसंद आया। इसी घटना को चाय की खोज की शुरुआत माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस की शुरुआत
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस को लेकर पहला आंदोलन वर्ष 2005 में शुरू हुआ था। इस पहल को एशिया और अफ्रीका के छोटे चाय उत्पादकों, श्रमिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं का समर्थन मिला। उनका उद्देश्य चाय उत्पादकों को उचित मूल्य दिलाना और मजदूरों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
बाद में संयुक्त राष्ट्र ने 21 मई को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस घोषित किया। यह दिन चाय उद्योग से जुड़े लाखों परिवारों की आजीविका और उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर माना जाता है।

