दिव्यांगता को हराकर जयपुर के दीपेंद्र ने फतह किया एवरेस्ट बेस कैंप, पेश की हौसले की मिसाल

जयपुर के दिव्यांग दीपेंद्र सिंह हाड़ा ने एवरेस्ट बेस कैंप फतह कर पेश की मिसाल, कठिन परिस्थितियों के बावजूद साहस और आत्मविश्वास से रचा नया इतिहास।

Razi Ahmad
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Deependra Conquers Everest Base Camp : राजस्थान के जयपुर निवासी दीपेंद्र सिंह हाड़ा ने शारीरिक दिव्यांगता को मात देते हुए दुनिया के सबसे कठिन ट्रेक में से एक माने जाने वाले एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचकर भारतीय तिरंगा फहराया है। सात साल की उम्र में एक हादसे में अपना दाहिना हाथ गंवाने के बावजूद दीपेंद्र ने हार नहीं मानी और अपने साहस व आत्मविश्वास से नई मिसाल कायम की।

दीपेंद्र ने बताया कि एवरेस्ट बेस कैंप तक का सफर बेहद कठिन था। करीब 5,364 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने के दौरान बर्फीली हवाएं, ऑक्सीजन की कमी, कठिन रास्ते और लगातार बदलते मौसम ने हर कदम पर चुनौती पेश की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक ट्रेक नहीं, बल्कि समान अवसर और समावेशिता का संदेश देने की कोशिश भी थी।

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दीपेंद्र ने बताया कि साल 2008 में एक दर्दनाक हादसे में उनका हाथ 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गया था। लंबा इलाज चलने के बाद डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए हाथ काटना पड़ा। शुरुआती दिनों में यह संघर्ष बेहद मुश्किल रहा, लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरी को ताकत में बदलने का फैसला किया।

कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने वाले दीपेंद्र हमेशा से तकनीक और एडवेंचर गतिविधियों में रुचि रखते थे। उन्होंने पैराग्लाइडिंग, बंजी जंपिंग, साइक्लिंग, जेट स्कीइंग जैसी कई रोमांचक गतिविधियों में हिस्सा लिया और खुद को हर चुनौती के लिए तैयार किया।

दीपेंद्र का कहना है कि किसी व्यक्ति की असली सीमा उसकी दिव्यांगता नहीं, बल्कि समाज की सोच होती है। अगर अवसर और सहयोग मिले तो हर व्यक्ति अपनी क्षमता के दम पर बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल कर सकता है। उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा का बड़ा उदाहरण बन गई है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।