
रांची : झारखंड विधानसभा का माहौल उस वक्त गमगीन हो गया जब महिला कर्मचारी अंजना तिवारी का शव विधानसभा परिसर के पोर्टिको में लाया गया। शव को देखते ही ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की आंखें नम हो गईं। हर तरफ शोक और गुस्से का माहौल देखने को मिला। उत्तर प्रदेश के रायबरेली की रहने वाली अंजना तिवारी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी। कोविड काल में पति की मौत के बाद वह अपनी 12 साल की बेटी के साथ रांची के मोरहाबादी इलाके में रह रही थीं। परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। बताया जा रहा है कि अंजना तिवारी को गॉल ब्लैडर की समस्या थी, जिसके इलाज के लिए उन्हें रांची के सेंटेविटा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी गॉल ब्लैडर सर्जरी की गई, लेकिन ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी।
परिजनों और सहकर्मियों का आरोप है कि सर्जरी के दौरान डॉक्टरों की ओर से लापरवाही बरती गई। आरोप यह भी है कि महज दो घंटे के भीतर मरीज को छह यूनिट ठंडा ब्लड चढ़ा दिया गया, जिसके बाद उनकी हालत और ज्यादा खराब हो गई। स्थिति बिगड़ती देख सेंटेविटा अस्पताल ने अंजना तिवारी को दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद विधानसभा कर्मियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। सहकर्मियों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विधानसभा परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामले की जानकारी मिलते ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और विधायक सीपी सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि मौत के बाद की सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। साक्ष्य जुटाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अंजना तिवारी की वृद्ध सास ने इस मामले में न्याय की गुहार लगाई है। दूसरी ओर विधानसभा सचिव ने कहा कि इस मौत के लिए जो भी जिम्मेदार होंगे, उनकी जानकारी पुलिस और प्रशासन को दे दी गई है, ताकि आगे उचित कार्रवाई की जा सके।

