
अभिनेता, लेखक और थिएटर कलाकार मानव कौल का मानना है कि जीवन का दौर चाहे जैसा भी हो, व्यक्ति को खुद को प्रेरित करते हुए लगातार अच्छा काम करते रहना चाहिए। फिल्म तुम्हारी सुलु से लोकप्रियता हासिल करने वाले मानव कौल ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कई प्रेरणादायक बातें साझा कीं। मानव ने बताया कि मुंबई आने के शुरुआती दिनों में आर्थिक परिस्थितियां बेहद कठिन थीं। वह एक चाल में रहते थे और दिनभर का खर्च लगभग 30 रुपये में चलाना पड़ता था। उनके पास न तो घूमने-फिरने के पैसे होते थे और न ही मनोरंजन के अन्य साधन।
‘अगर मोबाइल और रील्स का दौर होता, तो शायद भटक जाता’
मानव कौल का कहना है कि उन्होंने अपने खाली समय को कभी बेकार नहीं जाने दिया। उन्होंने किताबों को अपना साथी बनाया और पढ़ने की आदत विकसित की। उनके अनुसार, किताबों ने न केवल उनका मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से मजबूत भी बनाया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि यदि उस समय आज की तरह मोबाइल फोन और रील्स का दौर होता, तो शायद उनका ध्यान भटक जाता। मानव का मानना है कि कलाकारों के जीवन का बड़ा हिस्सा इंतजार में बीतता है, इसलिए उस समय का सही उपयोग करना बेहद जरूरी है। उनकी यह सोच बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

