
स्पीति : खत या चिट्ठी को लेकर पहले अनेक शे’र ओ शायरी, कविताएं और गीत लिखे गए। लेकिन आज के डिजिटल युग में तो जैसे कई लोग डाक टिकट, पोस्टकार्ड या अंतर्देशीय पत्र भूल ही गए होंगे। इधर, हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में स्थित दुनिया का सबसे ऊंचा ‘हिक्किम डाकघर’ इससे अलग ही दास्तां बयां कर रहा है। समुद्र तल से 14,567 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह डाकघर इन दिनों पर्यटकों के लिए किसी जादुई गंतव्य से कम नहीं है। यहां अपने प्रियजनों को हाथ से लिखी चिट्ठियां और पोस्टकार्ड भेजने के लिए सैलानियों की ऐसी दीवानगी देखी जा रही है कि मात्र चार दिनों में 98 हजार रुपये के डाक टिकट बिक गए।
मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से निजात पाने आए सैलानी अब व्हाट्सएप और ईमेल के शोर से दूर, हिक्किम की शांत वादियों से अपनों को संदेश भेजना पसंद कर रहे हैं। पर्यटकों का मानना है कि इस दुर्गम ऊंचाई और बर्फीले वातावरण के बीच से भेजी गई चिट्ठी प्राप्त करना उनके परिजनों के लिए एक अनूठा और कभी न भूलने वाला अहसास है। यही कारण है कि डाकघर के बाहर पर्यटकों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। अपनों को खत लिखते हुए लोग मानो गुनगुना रहे हों, लिखे जो खत तुझे जो तेरी याद में, हजारों रंग के नजारे बन गये।
भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील यह क्षेत्र साल के आठ महीने भारी बर्फबारी के कारण दुनिया से कटा रहता है। यहां पर्यटन के लिए साल में केवल चार महीने ही अनुकूल होते हैं। स्पीति की उपायुक्त किरण भड़ाना का कहना है कि पर्यटकों की सुविधा के लिए स्थल पर बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। वहीं, पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मार्कण्डेय के अनुसार, साहसिक पर्यटकों के लिए यह केंद्र गौरव का विषय है। यह डाकघर भारतीय संस्कृति और धैर्य का वैश्विक प्रतीक बन चुका है।

