
नई दिल्ली : भारत को आमों का देश कहा जाता है और मध्यप्रदेश इस पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल है। प्रदेश की जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और विविध भौगोलिक परिस्थितियां आम उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती हैं। दशहरी, लंगड़ा, चौसा, केसर, आम्रपाली, अल्फांसो और तोतापरी जैसी लोकप्रिय किस्मों के बीच एक ऐसी अनोखी प्रजाति भी है, जिसने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। यह है नूरजहां आम, जिसे “किंग ऑफ मैंगो” के नाम से भी जाना जाता है।
मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पैदा होने वाला नूरजहां आम अपने विशाल आकार, अद्वितीय स्वाद और आकर्षक स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। इसे दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाता है। सामान्य रूप से एक नूरजहां आम का वजन 2 से 5 किलोग्राम तक होता है। इसका आकार इतना बड़ा होता है कि एक ही फल पूरे परिवार के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसका आकर्षक रंग, सुगंध और मिठास लोगों को पहली नजर में ही आकर्षित कर लेते हैं। बाजार में इसकी कीमत 1500 रुपये से लेकर 3000 रुपये प्रति फल तक पहुंच जाती है, जबकि कुछ विशेष परिस्थितियों में यह इससे भी अधिक कीमत पर बिकता है। नूरजहां आम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सीमित उपलब्धता है। इसके पेड़ों पर सामान्य आमों की तुलना में कम फल लगते हैं, जिसके कारण इसकी कीमत कई गुना अधिक रहती है। कई बार एक-एक फल हजारों रुपये में बिकता है। यही वजह है कि यह आम किसानों के लिए लाभकारी फसल के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कट्ठीवाड़ा का मौसम, मिट्टी और तापमान इस किस्म के लिए बेहद अनुकूल हैं, जिससे यहां पैदा होने वाले नूरजहां आम की गुणवत्ता देश में सबसे बेहतर मानी जाती है।
अफगानिस्तान से मध्यप्रदेश तक का सफर
नूरजहां आम का इतिहास भी बेहद दिलचस्प है। माना जाता है कि यह प्रजाति वर्षों पहले अफगान क्षेत्र से भारत पहुंची थी। बाद में 1950 और 1960 के दशक में यह मध्यप्रदेश के मालवा और आदिवासी अंचल झाबुआ-आलीराजपुर क्षेत्र में विकसित हुई। आलीराजपुर जिले के ग्राम जूना कट्ठीवाड़ा स्थित शिव (बावड़ी) आम फार्म के कृषक भरतराज सिंह जादव के अनुसार, उनके पिता स्वर्गीय रणवीरसिंह जादव करीब 55 से 60 वर्ष पहले गुजरात के बनमाह क्षेत्र से नूरजहां का पौधा लेकर आए थे। वर्षों की मेहनत और संरक्षण के बाद यही पौधा पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया।उन्होंने बताया कि ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार किए गए विशेष पौधों की बदौलत अब इस किस्म का विस्तार हो रहा है। वर्तमान में उनके द्वारा तैयार किए गए कई ग्राफ्टेड पौधे विकसित हो रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुका सम्मान
कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में नूरजहां आम की ख्याति कई दशकों पुरानी है। इसकी विशिष्टता को देखते हुए वर्ष 1999 और 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया था। इन सम्मानों ने न केवल किसानों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि आलीराजपुर जिले को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई। आज नूरजहां आम मध्यप्रदेश की उद्यानिकी पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है।
विदेशों में भी बढ़ रही मांग
नूरजहां आम की लोकप्रियता अब भारत की सीमाओं से निकलकर विदेशों तक पहुंच चुकी है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में इसकी विशेष मांग है। वहां बड़े आकार और आकर्षक स्वरूप वाले फलों को काफी पसंद किया जाता है। इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में बसे भारतीय समुदायों के बीच भी नूरजहां आम तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सिंगापुर और मलेशिया जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी इसकी पहचान बन रही है। हालांकि उत्पादन सीमित होने के कारण इसका निर्यात बड़े पैमाने पर नहीं हो पाता, लेकिन इसकी दुर्लभता और प्रीमियम गुणवत्ता ने इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में “लक्जरी मैंगो” का दर्जा दिला दिया है।

