
विवेकानंद सिंह कुशवाहा
इलॉन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलिनियर (ट्रिलियनेयर) बन गये हैं। एक ट्रिलियनेयर का मतलब है 1 हजार अरब डॉलर का मालिक बनना। इस पैसे अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पूरे भारत की अर्थव्यवस्था 3.5 हजार अरब डॉलर की है।
मस्क से पहले कोई एक व्यक्ति इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाया था। स्पेस-X के शेयर के सार्वजनिक होते ही इलॉन मस्क ने यह इतिहास रच दिया। मस्क सात कंपनियों के को-फाउंडर हैं। आज कई विश्वस्तरीय कंपनियों के वह मालिक हैं।
मस्क की धनवान बनने की यात्रा के दो सबक हैं। पहला है ‘स्किल’ और दूसरा है- ‘पैसे का सही निवेश’। दक्षिण अफ्रीका में जन्मे मस्क ने बचपन में खुद से कोडिंग सीखी और एक गेम बनाया ‘ब्लास्टर’ और उसको 500 डॉलर में बेच दिया। यानी मस्क ने अपनी ‘स्किल’ की दम पर पहले एक गेम बनाया और फिर उसे पैसे (डॉलर) में बदल दिया।
यहीं से मस्क को पैसा बनाने का फॉर्मूला मिल गया। यही यात्रा मस्क ने आगे भी जारी रखी। वैसे तो निजी जीवन में मस्क किस कदर के लापरवाह इंसान हैं, उसकी बानगी उनके 14 बच्चे हैं। पत्नियों से उसकी बनी नहीं तो तलाक पर तलाक भी होते रहे, लेकिन पैसे कमाने का जुनून मस्क को इतिहास का पहला ट्रिलिनियर बना गया।
मस्क की साल-दर-साल की कमाई के ग्राफ पर जब आप नजर डालेंगे तो पायेंगे कि जिन वर्षों में दुनिया के आम लोगों की चुनौतियां बढ़ीं, जैसे- 2021 और 2026 में मस्क की कमाई ज्यादा हुई। यही पूंजीवादी दुनिया का कमाल है। आप जब आर्थिक संकट से दो-चार हो रहे होंगे, पूंजीपतियों की उसी समय चांदी होती है। खैर, इलॉन मस्क ने अपने भाई के साथ मिलकर 1995 में Zip2 नाम की एक कंपनी शुरू की। फिर 1999 में वह कंपनी बेच दी और पहली बार उससे करोड़ों डॉलर बनाये। 1999 में ही मस्क ने Zip2 से मिले पैसे की मदद से ऑनलाइन बैंकिंग/पेमेंट कंपनी X.com शुरू की, जो बाद में PayPal बनी। 2002 में PayPal को eBay ने खरीद लिया और मस्क को लगभग 180 मिलियन डॉलर मिले।
इसके बाद मस्क ने वह पैसा स्पेस-X कंपनी में लगा दिया। शुरुआत में लगा कि स्पेस-X कहीं मस्क को कंगाल न बना दे, पर शुरुआती फेलियर के बाद मस्क की स्पेस-X ने जो उड़ान भरी, उसके बाद NASA को भी उसकी जरूरत पड़ने लगी।
फिर मस्क Tesla, Twitter, xAI जैसी कंपनियों को अपना एसेट बनाते चले गये। आप देखेंगे कि मस्क का ‘लापरवाह’ होना भी उनके अमीर बनने के काम आया, उसी लापरवाही का नतीजा रहा कि उन्होंने टाइम टू टाइम रिस्क लिया।
यानी मेरी समझ कहती है कि आपके पास ‘स्किल और सही समय पर रिस्क लेने की क्षमता’ है तो आप भी इलॉन मस्क बन सकते हैं। हां, भारत में यह थोड़ा मुश्किल होगा, क्योंकि भ्रष्टाचार की जड़ें यहां गहराई तक धंसी हैं, फिर भी चांस लेने में क्या जाता है। बस इलॉन से प्रेरणा लेने से पहले थोड़ा होमवर्क कर लीजियेगा। यदि पोस्ट पूरा पढ़ लिये हैं, तो लगे हाथ शेयर भी कर ही दीजिए।

