
अभिनेत्री अनन्या पांडे आज की पीढ़ी की उन कलाकारों में शामिल हैं, जो सोशल मीडिया और फिल्मों दोनों में सक्रिय रहते हुए अपने काम को गंभीरता से लेती हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने नेपोटिज्म, विशेषाधिकार और करियर की चुनौतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने साफ कहा कि वे इस बहस को दबाव नहीं बल्कि बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा के रूप में देखती हैं।
काम से मिल रही पहचान और बढ़ती उम्मीदें
अनन्या ने बताया कि वह अपने काम को एंजॉय कर रही हैं और हर फिल्म से कुछ नया सीख रही हैं। ‘खो गए हम कहां’, ‘कंट्रोल’ और ‘कॉल मी बे’ जैसी परियोजनाओं में उनके अभिनय को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्मीदें उन्हें डराने के बजाय और बेहतर करने के लिए प्रेरित करती हैं।
ट्रोलिंग और आलोचना में फर्क समझाया
सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर बात करते हुए अनन्या ने कहा कि वे नकारात्मक टिप्पणियों और रचनात्मक आलोचना में फर्क समझती हैं। उनके अनुसार, ट्रोलिंग को गंभीरता से लेने के बजाय उसे नजरअंदाज करना बेहतर है, जबकि असली सीख केवल डायरेक्टर्स और क्राफ्ट से मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि वे इंस्टाग्राम पर ऐसे पेजों को म्यूट कर देती हैं जो उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं।
असुरक्षा को बनाया अपनी ताकत
अनन्या ने स्वीकार किया कि हर कलाकार कभी न कभी असुरक्षा और आत्म-संदेह महसूस करता है। लेकिन उनके अनुसार, यही भावनाएं उन्हें सतर्क और बेहतर बनाती हैं। वह सेट पर हर दिन थोड़ी नर्वसनेस महसूस करती हैं ताकि सीखने की प्रक्रिया जारी रहे और वह खुद को लगातार चुनौती देती रहें।
डिजिटल स्पेस को सकारात्मक बनाने की कोशिश
अनन्या ने बताया कि वह अब ऑनलाइन स्पेस को सकारात्मक बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। उनकी पहल ‘So Positive’ का उद्देश्य डिजिटल बुलिंग के बजाय दयालुता और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार को बढ़ावा देना है। उनका मानना है कि सोशल मीडिया को नकारात्मकता नहीं, बल्कि सकारात्मकता का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

