राजनीति में मानवीय संवेदना और करुणा के लिए जगह होनी चाहिए: उमर अब्दुल्ला

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से बातचीत नहीं करने पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने मानवीय संवेदना और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 19 दिन से अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से संपर्क नहीं करने को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि राजनीति में मानवीय संवेदना और करुणा के लिए जगह होनी चाहिए। अब्दुल्ला ने कहा कि वांगचुक की केवल एक मांग है: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने लद्दाख के कार्यकर्ता और राष्ट्रीय राजधानी में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कई अन्य लोगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा मंत्री को या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हैरानी की बात है कि उन्हें अनशन पर बैठे 18 दिन हो गए हैं, शायद आज 19वां दिन है। उनका लगभग नौ किलोग्राम वजन कम हो गया है और इसका उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है लेकिन सरकार अपने रुख पर कायम है और किसी भी तरह उनसे अनशन समाप्त करने की अपील नहीं कर रही। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन कहीं न कहीं इसमें मानवीय संवेदना और करुणा के लिए भी स्थान होना चाहिए।’’ अब्दुल्ला ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए आंदोलन के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रियों को प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए भेजा था और उन्हें अनशन समाप्त कर संवाद का रास्ता अपनाने के लिए मनाने का प्रयास किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अब तक सोनम वांगचुक से बातचीत का कोई प्रयास नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख क्या होगा, यह तो नहीं पता, लेकिन हमें निश्चित रूप से वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता है।’’ अब्दुल्ला ने कहा कि यदि उनके चाचा एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता मुस्तफा कमाल का निधन नहीं हुआ होता, तो उनकी पार्टी का कोई नेता वांगचुक के साथ प्रदर्शन में शामिल होता। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम गमगीन नहीं होते, तो शायद हममें से कोई वहां जाता और उनके प्रति अपना समर्थन व्यक्त करता। लेकिन वह हमारी बातें सुनने के लिए भूख हड़ताल पर नहीं बैठे हैं। उन्हें सरकार की ओर से आश्वासन मिलना चाहिए।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगें अनुचित नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कई लोग (नेता) वहां गए हैं। वे नीट परीक्षा के मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं, हमें भी लगता है कि उनकी मांग गलत नहीं बल्कि सही है। लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि यह सरकार इन बातों पर ध्यान क्यों नहीं देती है।’’ नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 25 दिनों से अधिक समय से प्रदर्शन कर रही है। वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तब से अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। अब्दुल्ला ने उन लोगों की भी आलोचना की, जो उनके परिवार में हुई मौत के बावजूद राजनीतिक टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यहां शोकसभा जारी है। कल ‘चौरम’ (शोक का चौथा दिन) है। ऐसे समय में राजनीति से कुछ दूरी रखनी चाहिए। हैरानी की बात है कि जो लोग अंदर आकर शोक संवेदना व्यक्त करते हैं, वही बाहर निकलकर राजनीति करने लगते हैं। यदि राजनीति ही करनी है, तो शोक व्यक्त करने मत आइए, क्योंकि यह अजीब लगता है।’’

Share This Article
विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।