


नई दिल्ली : दरअसल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (उबाठा) के छह बागी सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी थी। इसके साथ ही, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों, जिन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) का गठन किया है, उन्हें लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की भी स्वीकृति दी गई।





संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे UBT) के बागी सांसदों से जुड़े मामलों को लेकर विरोध जताते हुए बैठक से वॉकआउट किया। हालांकि, कुछ देर बाद विपक्षी नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने बैठक से बाहर आने के बाद कहा कि संविधान की भावना के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और शिवसेना (उबाठा) के साथ जो हुआ है, उसके विरोध में विपक्ष ने बहिर्गमन किया।
