
फरीदाबाद : इराक के रहने वाले युवा ताहा हसन अली, जो लंबे समय से लगातार सिरदर्द, आंखों की रोशनी कम होने और हार्मोनल गड़बड़ी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे थे, उन्हें मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स फरीदाबाद में अत्याधुनिक स्कार फ्री ब्रेन सर्जरी के जरिए नया जीवन मिला। खास बात यह कि डॉक्टरों ने बिना खोपड़ी खोले और बिना शरीर पर किसी बाहरी चीरे के, केवल नाक के रास्ते न्यूरोनैविगेशन तकनीक की मदद से मस्तिष्क में मौजूद ब्लीडिंग पिट्यूटरी ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया। करीब तीन घंटे चली इस जटिल सर्जरी के बाद मरीज को पांचवें दिन स्वस्थ हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
ताहा हसन अली की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी।
कम उम्र में ही उन्हें तेज सिरदर्द और आंखों की रोशनी कम होने की समस्या होने लगी थी। इलाज के लिए वह भारत पहुंचे। जांच के दौरान दोनों आंखों के विजुअल फील्ड में कमी पाई गई। इसके बाद कराए गए कॉन्ट्रास्ट एमआरआई में पिट्यूटरी ग्रंथी में ट्यूमर के साथ उसके भीतर रक्तस्राव (पिट्यूटरी एपोप्लेक्सी) की पुष्टि हुई। यह स्थिति न्यूरोसर्जरी की दृष्टि से बेहद गंभीर और जानलेवा मानी जाती है। हॉस्पिटल्स की मल्टीडिसिप्लिनरी न्यूरोसर्जरी टीम ने अत्याधुनिक न्यूरोनैविगेशन सिस्टम की सहायता से सर्जरी की विस्तृत योजना बनाई। इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व डॉ. तरुण शर्मा निदेशक न्यूरोसर्जरी ने किया। उनके साथ डॉ. सचिन गोयल, यूनिट हेड और डॉ. मनीष मिश्रा कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन भी शामिल रहे। डॉक्टरों की टीम ने नाक के रास्ते एंडोस्कोपिक तकनीक से मस्तिष्क के सेल्ला क्षेत्र में स्थित ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया।

