
रांची : झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने नक्सल विरोधी अभियान में अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। दशकों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकने वाला और भाकपा (माओवादी) का सबसे बड़ा चेहरा, पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा (उर्फ सागर/भास्कर/सुर्निमल) अब सलाखों के पीछे है। उस पर झारखंड और ओडिशा सरकार ने कुल 2.20 करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम रखा था। पुलिस मुख्यालय में बुधवार को आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान डीजीपी तदाशा मिश्रा और आईजी (अभियान) नरेंद्र सिंह ने इस ‘सीक्रेट ऑपरेशन’ का पूरा खुलासा किया।
सीक्रेट ‘ऑपरेशन दौरा पहाड़’ में मिली कामयाबी
28 जुलाई (मंगलवार) को धनबाद और गिरिडीह जिला पुलिस ने 209 कोबरा (COBRA) बटालियन के साथ मिलकर धनबाद के बरवड्डा जंगलों में ‘ऑपरेशन दौरा पहाड़’ चलाया। यह ऑपरेशन इतना गुप्त था कि इसकी भनक किसी को नहीं लगने दी गई। इसी सघन तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने मिसिर बेसरा को उसके खतरनाक साथियों के साथ दबोच लिया।
गिरफ्तार किए गए अन्य नक्सलियों में 15 लाख का इनामी रीजनल कमेटी मेंबर (RCM) मेहनत उर्फ मोछू, एरिया कमेटी मेंबर (ACM) गौरव हांसदा और दो अन्य सहयोगी शामिल हैं। इनके पास से तीन AK-47 राइफल, आठ मैगजीन और 288 जिंदा कारतूसों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ है, जिससे भविष्य की किसी बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया गया है।
कौन है मिसिर बेसरा? 30 सालों से फैला रखा था आतंक
मिसिर बेसरा का नाम पुलिस की ‘मोस्ट वांटेड’ लिस्ट में सबसे ऊपर था। वह पिछले तीन दशकों से झारखंड, ओडिशा, बिहार और अन्य राज्यों में खूनी खेल खेल रहा था। उसके खिलाफ 175 से 200 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं।
इन बड़ी वारदातों का था मास्टरमाइंड
साल 2001 में चुरचू (हजारीबाग) में CRPF के 12 जवानों की हत्या, तोपचांची में 13 पुलिसकर्मियों की हत्या, जहानाबाद जेल ब्रेक, गिरिडीह होमगार्ड शस्त्रागार से 186 रायफल लूटना और 2022 में पूर्व विधायक गुरुचरण नायक के अंगरक्षकों की हत्या जैसी खौफनाक वारदातों का वह मुख्य साजिशकर्ता रहा है।


