
शाहरुख खान ने 1992 में फिल्म दीवाना से बॉलीवुड में कदम रखा था, लेकिन 1993 में रिलीज हुई बाजीगर और डर ने उन्हें हिंदी सिनेमा का उभरता हुआ सुपरस्टार बना दिया। इन फिल्मों में उन्होंने पारंपरिक हीरो की बजाय ग्रे और जटिल किरदार निभाकर अपनी अलग पहचान बनाई। खासकर डर में उनके द्वारा निभाया गया जुनूनी प्रेमी राहुल मेहरा आज भी बॉलीवुड के सबसे यादगार किरदारों में गिना जाता है।
सुधेश बेरी थे पहली पसंद
हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि राहुल मेहरा के किरदार के लिए शाहरुख खान पहली पसंद नहीं थे। अभिनेता सुधेश बेरी ने हाल ही में खुलासा किया है कि शुरुआत में यह भूमिका उन्हें ऑफर की गई थी। उन्होंने बताया कि फिल्म के लिए उनके कॉस्ट्यूम तक तैयार हो चुके थे और लगभग सारी तैयारियां पूरी हो गई थीं, लेकिन बाद में निर्माताओं ने अपना फैसला बदल दिया।
बदलते रहे फिल्म के मुख्य कलाकार
Accompany Akki पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान सुधेश बेरी ने बताया कि फिल्म के दूसरे मुख्य किरदार के लिए पहले ऋषि कपूर का नाम सामने आया था। इसके बाद आमिर खान पर भी विचार किया गया और अंततः सनी देओल को फिल्म में कास्ट किया गया। उन्होंने कहा कि फिल्म की कास्टिंग कई बार बदली गई, जिससे कहानी और पात्रों को लेकर निर्माताओं को नए सिरे से सोचने का मौका मिला।
क्लाइमैक्स बना बदलाव की वजह
सुधेश बेरी के अनुसार, फिल्म के क्लाइमैक्स का एक दृश्य कास्टिंग में बदलाव की बड़ी वजह बना। उन्होंने बताया कि अंत में उनके किरदार को दूसरे मुख्य पात्र को मुक्का मारना था। निर्माताओं को लगा कि यदि उनके सामने कोई बड़ा स्टार होगा तो यह दृश्य दर्शकों को उतना प्रभावी नहीं लगेगा। यश चोपड़ा चाहते थे कि किरदार पूरी तरह विश्वसनीय लगे और इसी सोच के चलते उन्होंने नया फैसला लिया।
यश चोपड़ा के फैसले ने बदल दिया इतिहास
सुधेश बेरी ने कहा कि यश चोपड़ा बेहद जुनूनी फिल्मकार थे और अपनी फिल्मों को बेहतर बनाने के लिए हर पहलू पर ध्यान देते थे। उनका मानना था कि उस समय सुधेश बेरी इतने बड़े किरदार के लिए नए थे। बाद में यह भूमिका शाहरुख खान को मिली और उन्होंने इसे अपने करियर के सबसे प्रतिष्ठित किरदारों में बदल दिया।

