

रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम-2025 का कड़ा विरोध किया है। झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि इस संशोधन के लागू होने से झारखंड के अधिकारों की हकमारी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि झामुमो इस कानून को राज्य के हितों के खिलाफ मानते हुए लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी तरीके से इसका पुरजोर विरोध करेगा।





रांची के हरमू स्थित सोहराय भवन में झामुमो केंद्रीय समिति की विस्तारित बैठक हुई। बैठक में एमएमडीआर कानून में किए गए संशोधन, परिसीमन, एसआईआर और पेपर लीक समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और आगे की रणनीति तय की गई। हेमंत सोरेन ने कहा कि बिना किसी सलाह-मशविरा के संसद के मानसून सत्र में एमएमडीआर विधेयक पारित कराया गया, जिसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव झारखंड के आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों, मजदूरों और किसानों पर पड़ेगा।
हर साल 20 हजार करोड़ के नुकसान का दावा
बैठक में दावा किया गया कि संशोधित कानून लागू होने से झारखंड को हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। इसका असर मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, सर्वजन पेंशन योजना समेत कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर पड़ने की बात कही गई। हेमंत सोरेन ने सवाल उठाया कि कानून लागू होने से राज्य को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार कैसे करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र पर राज्य का पहले से करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया है।
गांव-गांव जाकर लोगों को करेंगे जागरूक
झामुमो ने तय किया कि इस मुद्दे को जिला और राज्य स्तर तक ले जाकर जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आर्थिक नाकेबंदी की भी चेतावनी दी गई है। पार्टी कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर लोगों को संशोधन के प्रभावों के बारे में जागरूक करने का निर्देश दिया गया। हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार खनन कानून में संशोधन कर झारखंड जैसे राज्यों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सक्षम राज्यों और वर्गों के प्रति संवेदनशील नहीं है। बैठक में सांसद विजय हांसदा, नलिन सोरेन, बैद्यनाथ राम, विधायक कल्पना सोरेन, प्रो. स्टीफन मरांडी, हेमलाल मुर्मू समेत कई नेता मौजूद थे।
