

नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी कि फुटपाथ पवित्र और सुरक्षित स्थान है और ये वाहनों के लिए नहीं हैं इसलिए, तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाए जा रहे ट्रक की चपेट में आए एवं सड़क किनारे बाल काटने का काम करने वाले नाई को ‘लापरवाही में साझेदारी’ के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।





न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने 19 अगस्त को दिये फैसले में दिल्ली के आनंद पर्वत औद्योगिक क्षेत्र में फुटपाथ पर अपनी दुकान चलाने वाले नाई को मिलने वाले मुआवज़े की राशि बढ़ा दी।
