

रांची: झारखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री को पत्र लिखकर राज्य के सभी स्कूलों में आपदा प्रबंधन और आपातकालीन निकासी के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढांचा और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की मांग की गई है। इस संबंध में सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा ने नेपाल की हालिया विनाशकारी बाढ़ का उदाहरण दिया है, जहां प्रिंसिपल के त्वरित निर्णय और सुरक्षा नियमों के पालन की वजह से करीब 1,600 विद्यार्थियों की जान समय रहते बचाई जा सकी। इसी घटना को सबक मानते हुए झारखंड के शैक्षणिक संस्थानों में भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीतियां बनाने की अपील की गई है।





पत्र में लिखा गया है कि भारत बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, आग और आकाशीय बिजली जैसी विभिन्न प्राकृतिक व अन्य आपदाओं के प्रति संवेदनशील है। चूंकि बच्चे दिन का एक बड़ा हिस्सा स्कूलों में बिताते हैं, इसलिए हर स्कूल के लिए एक विशिष्ट आपदा प्रबंधन योजना अनिवार्य की जानी चाहिए। इसके अंतर्गत समय-समय पर मॉक ड्रिल कराने, सुरक्षित निकासी मार्ग तय करने, निर्णय लेने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने तथा आपातकाल के बाद छात्रों की गिनती और जवाबदेही तय करने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। इसके अलावा, पदाधिकारी द्वारा कागजी कार्रवाई की जांच के बजाय वास्तविक तैयारियों के सत्यापन के लिए सुरक्षा ऑडिट कराने पर जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रिंसिपल, शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS), सीपीआर (CPR) और प्राथमिक उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण अनिवार्य करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही हार्ट अटैक, डूबने या गंभीर चोट जैसी स्थितियों में शुरुआती मिनटों के महत्व को देखते हुए उच्च जोखिम वाले स्कूलों में AED की उपलब्धता, बस चालकों व परिवहन कर्मचारियों को आपात योजना में शामिल करने और पुलिस, अग्निशमन व स्वास्थ्य विभागों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने की जरूरत बताई गई है।
