

रायपुर: छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने मंगलवार को कहा कि उनके विभाग ने छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर बाघों के शिकार के मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश की है।





यह कदम तीन बाघों की खाल बरामद होने और इस सिलसिले में नौ लोगों की गिरफ्तारी के बाद उठाया गया है।
इस साल जून-जुलाई में राज्य के कांकेर और बीजापुर जिलों में दो अलग-अलग स्थानों से तीन बाघों की खाल बरामद की गई थीं।
नवा रायपुर अटल नगर में संवाददाताओं से बातचीत में कश्यप ने कहा कि बाघों की खाल बरामद होने की हालिया घटनाओं, खासकर महाराष्ट्र सीमा के पास हुई घटनाओं के संबंध में कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि तस्कर बाघों के पंजे और खाल की तस्करी में शामिल थे तथा मिलीभगत पाए जाने पर विभागीय अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है।
मंत्री ने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य पूरे मामले की तह तक पहुंचना है।
उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान वनकर्मियों ने सीमावर्ती गांवों में तलाशी अभियान चलाया, ताकि बाघों के शिकार की किसी अन्य घटना का पता लगाया जा सके, लेकिन ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया।
कश्यप ने कहा, ‘‘हालांकि, इस पूरे मामले में दूसरे राज्यों के लोग या अंतरराष्ट्रीय गिरोह भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए हमने दोषियों को सजा दिलाने के लिए मामला सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की है। एक बार सीबीआई जांच शुरू कर देगी तो हमें निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।’’
इससे पहले एक संवाददाता सम्मेलन में कश्यप ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में राज्य में बाघों की संख्या 18 थी, जो 2026 में बढ़कर 35 हो गई है। यह 94 प्रतिशत की वृद्धि है।
उन्होंने कहा कि 2,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला गुरुघासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है, जिसे वर्ष 2024 में अधिसूचित किया गया था।
कश्यप ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने बांधवगढ़ से तीन बाघिनों को छत्तीसगढ़ लाने की अनुमति दी है। इसके लिए बाड़े और पेट्रोलिंग कैंप तैयार हैं तथा बारिश के बाद उनका स्थानांतरण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या 77 से बढ़कर 200 से अधिक हो गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी 26 अप्रैल 2026 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस उपलब्धि की सराहना की थी।
कश्यप ने कहा, ‘‘वर्तमान में इंद्रावती में हमारे राजकीय पशु वन भैंसे 14 से 17 की संख्या में प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं, जबकि असम से लाए गए वन भैंसों की संख्या छह से बढ़कर 11 हो गई है। राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की संख्या 800 से 900 दर्ज की गई है और ‘मैना मित्र’ योजना के तहत 250 घोंसलों की पहचान की गई है।’’
उन्होंने बताया कि अचानकमार के औरापानी में वल्चर सेफ जोन विकसित किया गया है और इंद्रावती टाइगर रिजर्व में तीन प्रजातियों के 150 गिद्धों का संरक्षण किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप और ‘गजरथ यात्रा’ के माध्यम से तकनीक तथा सामुदायिक सहभागिता को जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि हाथियों के हमलों में होने वाली जनहानि में साल-दर-साल कमी आ रही है।
उन्होंने बताया कि 90 ‘हाथी मित्र’ दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। 12 अगस्त 2026 को विश्व हाथी दिवस के अवसर पर दरभा में ‘गज संकेत’ ऐप का विमोचन किया गया था। इस पहल को मुख्यमंत्री की ओर से राज्य स्तरीय सुशासन पुरस्कार भी मिला है।
कश्यप ने कहा कि पिछले दो वर्षों में बस्तर के माओवादी-प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति बेहतर होने से वन विभाग अत्यंत संवेदनशील इलाकों में वानिकी गतिविधियां तथा लकड़ी और बांस निकालने का काम फिर शुरू कर पाया है। दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर जिलों के दूरदराज के जंगलों में लकड़ी और बांस निकालने का काम किया जाएगा।
बाघों के शिकार का मामला इस साल 29 जून को सामने आया, जब वन अधिकारियों को सूचना मिली कि दो लोग महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से बाघ की खाल लेकर छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। एक संयुक्त दल ने कांकेर जिले में बांदे-पखांजूर मार्ग पर दोनों को रोका और दो खाल, 13 मूंछें तथा एक मोटरसाइकिल जब्त की।
आरोपियों की पहचान गढ़चिरौली निवासी बियेर गेड़ाम और बाबूराव मड़ावी के रूप में हुई। कश्यप ने बताया कि गेड़ाम महाराष्ट्र पुलिस की विशेष शाखा के आसूचना प्रकोष्ठ में आरक्षक था, जबकि मड़ावी पुलिस का मुखबिर था।
इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने गेड़ाम को निलंबित कर दिया और मड़ावी को पुलिस की ड्यूटी से हटा दिया।
पांच जुलाई को इंद्रावती नदी के पास बाघ की तीसरी खाल बरामद हुई। इसके अलावा नेतीवाड़ा गांव में संदिग्धों के घरों से फंदे, चाकू, 12 पंजे और चार नुकीले दांत जब्त किए गए।
छह जुलाई को सात और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें महाराष्ट्र के दो लोग शामिल थे। इसके साथ ही गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या नौ हो गई। लापरवाही के आरोप में तीन वनकर्मियों को भी निलंबित किया गया।
वन विभाग ने 27 जुलाई को राज्य के गृह विभाग को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।
