


नयी दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पंजाब के संगरूर जिले में एक व्यक्ति की कथित आत्महत्या के मामले को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान और मंत्री हरपाल सिंह चीमा के इस्तीफे की मंगलवार को मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि गांव में मादक पदार्थों की समस्या को लेकर चीमा से सवाल करने पर स्थानीय आम आदमी पार्टी (आप) नेताओं ने उस व्यक्ति पर माफी मांगने का दबाव बनाया था।





पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए चीमा के इस्तीफे की मांग की और कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। मीडिया की खबरों के अनुसार, संगरूर जिले में दिड़बा के रहने वाले दिहाड़ी मजदूर गुलजार सिंह (47) की सोमवार रात जहर खाने के बाद मौत हो गई। आरोप है कि सत्तारूढ़ पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं ने छह सितंबर को गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान चीमा से सवाल करने को लेकर गुलजार पर मंत्री से माफी मांगने का दबाव बनाया था।
भाटिया ने कहा, ‘‘चीमा जब उसके गांव के दौरे पर आए थे तब गुलजार सिंह ने मादक पदार्थों की समस्या का मुद्दा उठाया था। सिंह ने चीमा को बताया कि उसका बेटा ‘चिट्टा’ लेता है और उसने मंत्री से इसकी आपूर्ति रोकने के लिए कार्रवाई करने का आग्रह किया था।’’ भाजपा नेता ने कहा, ‘‘मंत्री के जाने के बाद गांव का सरपंच, जो ‘आप’ नेता भी है, गुलजार सिंह के घर गया और उससे अपनी टिप्पणी के लिए मंत्री से माफी मांगने को कहा।’’ ना तो ‘आप’ और न ही पंजाब सरकार ने भाजपा के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। भाटिया ने कहा, ‘‘जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो उसे पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री भगवंत मान को अपने पद से तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।’’
भाजपा प्रवक्ता ने संवाददाता सम्मेलन में एक वीडियो दिखाते हुए कहा कि अस्पताल में मौत से पहले गुलजार सिंह ने पूरा घटनाक्रम बताया था और चीमा के सामने मादक पदार्थों का मुद्दा उठाने पर उसे धमकाने वाले लोगों के नाम भी लिए थे। भाटिया ने कहा, ‘‘चीमा को भी तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।’’ भाजपा नेता ने मांग की कि वीडियो में गुलजार सिंह द्वारा जिन लोगों के नाम लिए गए हैं, उनके खिलाफ बीएनएस के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया जाए।
भाटिया ने कहा, ‘‘चूंकि वह (गुलजार सिंह) अनुसूचित जाति से था, इसलिए आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की जानी चाहिए।’’
