


श्रीनगर : कश्मीर के प्रमुख धार्मिक उपदेशक मीरवाइज उमर फारूक ने मंगलवार को कहा कि केंद्र को जम्मू कश्मीर में सामाजिक और राजनीतिक संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंधों पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करना शांति और स्थिरता के हित में होगा।





फारूक ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख गुलाम मोहम्मद भट के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए यह बात कही। भट ने अपने संगठन को ‘जस्टिस एंड डेवलपमेंट फ्रंट’ से अलग कर लिया था। यह राजनीतिक पार्टी 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले जमात के ही एक अलग हुए गुट ने शुरू की थी।
फारूक ने कहा, ‘‘शांति और स्थिरता के हित में यह जरूरी है कि नयी दिल्ली लोगों की अपील सुने और जम्मू कश्मीर में सामाजिक और राजनीतिक संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की अपनी नीति पर पुनर्विचार करे। इससे ऐसे प्रतिबंधों के साथ होने वाले उत्पीड़न और डराने-धमकाने की कार्रवाई को खत्म किया जा सकेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कुर्क की गई संपत्तियों और संस्थानों के मामले में संयम बरता जाना चाहिए तथा कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई की जानी चाहिए।’’ फारूक ने कहा कि जिन राजनीतिक दलों की वास्तव में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर मजबूत मौजूदगी है, उन्हें अपनी गतिविधियां जारी रखने की जगह दी जानी चाहिए और उनके साथ संवाद किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘कानून के शासन, निष्पक्षता और सार्थक राजनीतिक भागीदारी का सम्मान ही वास्तविक शांति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है।’’
