


रांची: राज्य सरकार ने चिटफंड और नॉन-बैंकिंग कंपनियों में गाढ़ी कमाई गंवाने वाले निवेशकों का पैसा वापस दिलाने की दिशा में एक बड़ी और ठोस पहल शुरू कर दी है। इसके तहत अब हर महीने कम से कम एक लंबित मामले का पूरी तरह से निपटारा किया जाएगा ताकि पीड़ित लोगों तक उनका पैसा जल्द से जल्द पहुंचाया जा सके। राजस्व पर्षद के अध्यक्ष मस्तराम मीना की अध्यक्षता में गठित समिति ने लंबित मामलों की गहन समीक्षा के बाद सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।





यह पूरा कदम हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (पीआईएल 585/2017) और सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी 2786/2024) के आलोक में उठाया गया है। प्रक्रिया को गति देने के लिए समिति की अगली महत्वपूर्ण बैठक 21 सितंबर को तय की गई है। इस बैठक से पहले सभी आयुक्तों को अपने-अपने नोडल अधिकारियों के जरिए अब तक निपटाए गए मामलों का पूरा ब्यौरा सौंपना होगा।
निवेशकों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए भी एक विशेष रणनीति तैयार की गई है। राज्य में जिन फर्जी कंपनियों की संपत्तियां पहले ही जब्त की जा चुकी हैं और जिन मामलों में जांच एजेंसियों ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है, उन चार्जशीट के आधार पर पीड़ित निवेशकों का ब्यौरा जुटाया जाएगा। प्रमंडलीय आयुक्त नोडल अफसरों की मदद से इन निवेशकों की प्रामाणिक जानकारी जुटाएंगे, ताकि कंपनियों की नीलाम की गई या जब्त संपत्तियों से मिलने वाली धनराशि को सही और वास्तविक पीड़ितों के खातों तक बिना किसी बाधा के पहुंचाया जा सके।
