हजारीबाग : विनोबा भावे विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक लाख से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं को योगदा सत्संग महाविद्यालय भेजे जाने और कुछ शिक्षकों द्वारा उत्तरपुस्तिकाएं घर ले जाकर मूल्यांकन किए जाने संबंधी सामने आई जानकारी के बाद झारखंड छात्र मोर्चा ने मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।

छात्र मोर्चा के अध्यक्ष चंदन सिंह का कहना है कि मामला सिर्फ उत्तरपुस्तिकाओं के एक संस्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाने तक सीमित नहीं है।
उनके अनुसार इतनी बड़ी संख्या में उत्तरपुस्तिकाएं विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम और भविष्य से सीधे जुड़ी हैं, इसलिए इनके आवंटन, रखरखाव, डिस्पैच और मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए।
चंदन सिंह ने सवाल उठाया कि उत्तरपुस्तिकाओं को भेजने का निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया और यदि मूल्यांकन के लिए कॉपियां शिक्षकों को उनके घर ले जाने की अनुमति दी गई थी तो इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से क्या व्यवस्था या स्वीकृति निर्धारित थी। छात्र मोर्चा ने इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
पुराने मामलों की फाइलें खोलने की मांग
छात्र संगठन ने परीक्षा विभाग से जुड़े कुछ पुराने मामलों को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की है। संगठन का दावा है कि पूर्व में परीक्षा शुल्क जमा होने के बावजूद विश्वविद्यालय के खाते में राशि नहीं पहुंचने से संबंधित शिकायतें सामने आई थीं। चंदन सिंह ने कहा कि यदि इन मामलों में जांच समितियां गठित हुई थीं तो उनकी रिपोर्ट और अब तक की कार्रवाई सार्वजनिक की जानी चाहिए।
इसी तरह ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद एडमिट कार्ड की छपाई और उससे जुड़े भुगतान को लेकर उठे सवालों की भी जांच की मांग की गई है। छात्र मोर्चा ने कहा कि निविदा, भुगतान और संबंधित दस्तावेजों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
रिकॉर्ड और सीसीटीवी सुरक्षित रखने की मांग
छात्र मोर्चा ने राज्यपाल-सह-कुलाधिपति से स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जांच के दौरान उत्तरपुस्तिकाओं के आवंटन व प्राप्ति रजिस्टर, डिस्पैच रिकॉर्ड, मूल्यांकन संबंधी दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज, परीक्षा शुल्क के बैंक रिकॉर्ड तथा एडमिट कार्ड मुद्रण से जुड़े निविदा और भुगतान दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं।
संगठन का कहना है कि जांच में यदि किसी तरह की अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
विश्वविद्यालय के जवाब का इंतजार
मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष जानने के लिए कुलपति से संपर्क का प्रयास किए जाने की बात छात्र मोर्चा ने कही है। हालांकि संपर्क नहीं हो पाने के कारण विश्वविद्यालय की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। ऐसे में उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया और लगाए गए आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक स्थिति सामने आने के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट होगी।


