हिंदी सिनेमा की चर्चित मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म ‘खामोश’ आज भी अपनी अलग पहचान रखती है। 1986 में रिलीज हुई इस फिल्म से जुड़ी एक दिलचस्प और भावुक कहानी अभिनेत्री सोनी राजदान ने साझा की है। उन्होंने बताया कि फिल्म के कलाकारों को शूटिंग के दौरान उनकी फीस नहीं मिली थी।

मेकर्स ने किया था एक खास वादा
सोनी राजदान के मुताबिक, निर्देशक और निर्माता विधु विनोद चोपड़ा ने फिल्म बनाते समय कलाकारों को तुरंत भुगतान नहीं किया था। हालांकि उन्होंने पूरी टीम से वादा किया था कि जैसे ही फिल्म कमाई करना शुरू करेगी, सभी कलाकारों को उनकी मेहनत की रकम दे दी जाएगी। उस वक्त कलाकारों ने इस वादे पर भरोसा किया और फिल्म पूरी की।
करीब 10 साल तक करना पड़ा इंतजार
फिल्म रिलीज होने के बाद कलाकारों को अपनी फीस के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ा। सोनी राजदान के अनुसार, करीब एक दशक बाद वह वक्त आया जब विधु विनोद चोपड़ा ने अपना वादा निभाया। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म को टेलीविजन राइट्स से कमाई हुई और केबल टेलीविजन पर इसे दर्शकों के बीच खास लोकप्रियता मिली।
जब कलाकारों के पास पहुंचे चेक
‘खामोश’ के टीवी प्रसारण से कमाई और फिल्म के धीरे-धीरे कल्ट फॉलोइंग हासिल करने के बाद चोपड़ा ने कलाकारों को चेक भेजे। यानी जिन कलाकारों ने फिल्म के निर्माण के समय भुगतान का इंतजार किया था, उन्हें लगभग 10 साल बाद उनकी मेहनत की रकम मिली।
‘खामोश’ ने बनाया खास मुकाम
‘खामोश’ समय के साथ हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्मों में शुमार हो गई। फिल्म की कहानी, रहस्य और सस्पेंस ने इसे दर्शकों के बीच लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखा। इसके साथ ही फिल्म से जुड़ी यह कहानी भी बताती है कि शुरुआती दौर में बनी फिल्मों के सफर में कलाकारों और निर्माताओं को किस तरह की चुनौतियों से गुजरना पड़ता था।
वादा निभाने की कहानी बनी यादगार
सोनी राजदान का यह खुलासा ‘खामोश’ की विरासत का एक अलग पहलू सामने लाता है। फिल्म बनने के वर्षों बाद कलाकारों को भुगतान किया जाना और निर्माता का अपना वादा निभाना इस फिल्म से जुड़ी उन कहानियों में शामिल हो गया है, जिन्हें हिंदी सिनेमा के प्रशंसक लंबे समय तक याद रख सकते हैं।


