तकनीकी साक्ष्यों और बयानों के आधार पर जांच
वरीय पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर महिला थाना प्रभारी एवं मामले की अनुसंधानकर्ता हेमा कुमारी के नेतृत्व में जांच की जा रही है। पुलिस कोडरमा से हजारीबाग तक मामले से जुड़े तथ्यों और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
एक वरीय पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान कुछ तकनीकी साक्ष्य मिले हैं। इसके अलावा कई लोगों के बयान से भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस का कहना है कि इन साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
इलाज के बाद वापस जेल भेजे गए सिविल सर्जन
आरोपी डॉ. अनिल कुमार को मंगलवार दोपहर बाद सदर अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वापस कोडरमा मंडल कारा भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार, रविवार देर रात उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उन्हें सदर अस्पताल के पेइंग वार्ड में भर्ती कराया गया था।
मंगलवार को दोबारा स्वास्थ्य जांच में उनकी स्थिति सामान्य पाए जाने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल में भर्ती कराए जाने पर उठे सवाल
आरोपी सिविल सर्जन को जेल से सदर अस्पताल के पेइंग वार्ड में स्थानांतरित किए जाने के बाद इस कदम को लेकर सवाल उठे थे। इस संबंध में जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हस्तक्षेप और स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी को फटकार लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इस घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा ने सरकार से मांगा जवाब
मामले को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष अनूप जोशी ने राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि किसी भी दबाव के बिना जांच होनी चाहिए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।
उन्होंने पीड़िता और उसके परिवार को आवश्यक सुरक्षा एवं सहयोग उपलब्ध कराने की मांग भी की। साथ ही कहा कि यदि मामले में किसी तरह की लापरवाही या आरोपी को बचाने का प्रयास हुआ, तो पार्टी इसका विरोध करेगी।
कांग्रेस ने मेडिकल जांच और सुरक्षा की उठाई मांग
कांग्रेस नेता सईद नसीम ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कोडरमा के उपायुक्त और बाल कल्याण समिति को ई-मेल के माध्यम से आवेदन भेजा गया है।
आवेदन में पीड़िता की मेडिकल जांच कोडरमा सदर अस्पताल के बजाय हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज या रिम्स, रांची में कराने की मांग की गई है। इसके अलावा पीड़िता और उसके परिवार को पुलिस सुरक्षा तथा गवाह संरक्षण उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
जांच के निष्कर्ष पर टिकी नजर
मामले में पुलिस की जांच जारी है। एक ओर तकनीकी साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों ने पीड़िता की सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
अब पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि मामले में आरोपों के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं।


