2008 में हुई थी नियुक्ति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता संतोष कुमार और अन्य की नियुक्ति वर्ष 2008 में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत एम्बुलेंस चालक के पद पर हुई थी। नियुक्ति के बाद से ही वे संविदा के आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
लंबे समय तक काम करने के बावजूद उनकी सेवाओं को नियमित करने का मामला लंबित रहा। नियमितीकरण की मांग पर कार्रवाई नहीं होने के बाद याचिकाकर्ताओं ने न्याय के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
नियमितीकरण की मांग पर हाईकोर्ट पहुंचा मामला
एम्बुलेंस चालकों की ओर से अदालत में लंबे समय से संविदा पर काम करने और सेवा नियमित नहीं होने का मुद्दा उठाया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्षों से लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा को नियमित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कृष्णा प्रजापति ने पक्ष रखा।
सिविल सर्जन को 12 सप्ताह में कार्रवाई का निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने हजारीबाग के सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को 12 सप्ताह के भीतर नियमितीकरण से जुड़े मामले में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अदालत के आदेश के बाद अब संबंधित अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। निर्धारित समय-सीमा के भीतर मामले पर विचार कर आवश्यक कदम उठाने होंगे।
एम्बुलेंस चालकों को नियमित होने की जगी उम्मीद
करीब 18 वर्षों से संविदा पर काम कर रहे इन कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट का आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित मांग पर कार्रवाई का निर्देश मिलने से उन्हें अपनी सेवा नियमित होने की उम्मीद है।
हालांकि, अदालत ने 12 सप्ताह के भीतर नियमितीकरण की प्रक्रिया पर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी याचिकाकर्ताओं की सेवाएं तत्काल नियमित कर दी गई हैं। अंतिम निर्णय संबंधित विभाग की कार्रवाई, लागू सेवा नियमों और पात्रता के आधार पर होगा।
अब विभाग की कार्रवाई पर टिकी नजर
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हजारीबाग के स्वास्थ्य विभाग को निर्धारित समय-सीमा के भीतर मामले में आगे बढ़ना होगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी नियमितीकरण के दावे पर क्या निर्णय लेते हैं और प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
लंबे समय से संविदा पर सेवा दे रहे एम्बुलेंस चालकों के लिए यह आदेश उनकी नियमितीकरण की मांग पर आगे की कार्रवाई का रास्ता खोलता है।


