रांची: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रमाकांत महतो ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य में मरीज इलाज के लिए त्रस्त हैं, स्वास्थ्य व्यवस्था पस्त है और स्वास्थ्य मंत्री रील बनाने में मस्त हैं। उन्होंने बिगड़ती स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्वास्थ्य मंत्री से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की है।

रमाकांत महतो ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी हैं। एक तरफ जहां आम जनता को समय पर इलाज, दवाइयां और आपातकालीन सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं।
108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े लगभग 2,000 ड्राइवरों और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों को जुलाई 2026 से मानदेय नहीं मिला है, जिसके कारण राज्य की करीब 500 एंबुलेंस के संचालन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे, जिससे आपातकालीन सेवाएं ठप हो सकती हैं।
कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि उन्हें बकाया वेतन के अलावा ईपीएफ, ईएसआईसी, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम मजदूरी जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
इसके अलावा भाजपा प्रवक्ता ने राज्य के डॉक्टरों के आंदोलन को भी स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चेतावनी बताया है। विभिन्न चिकित्सा संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, डॉक्टरों की सुरक्षा, डीएसीपी (डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन), नियमित नियुक्तियों और अन्य सेवा शर्तों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है।
चिकित्सकों ने 20 अक्टूबर तक काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन, 21 अक्टूबर को सांकेतिक आंदोलन और मांगें पूरी न होने पर 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है।
सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को जनता और मीडिया के सामने इन गंभीर मामलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल कागजी घोषणाओं और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को जमीनी स्तर पर उतरकर डॉक्टरों और कर्मचारियों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना होगा, ताकि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन सेवाएं सुचारु रूप से चल सकें।


