इंदौर (मध्यप्रदेश): सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने सरकार से आनुवंशिक तौर पर संवर्धित सोयाबीन के आयात को अनुमति नहीं देने की मांग दोहराते हुए शुक्रवार को कहा कि सस्ती विदेशी सोयाबीन आने से जहां भारतीय किसानों के हित प्रभावित होंगे, वहीं खाद्य तेल और प्रोटीन की जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता बढ़ जाएगी।

सोपा के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने इंदौर में अंतरराष्ट्रीय सोयाबीन सम्मेलन के दौरान संवाददाताओं से कहा,‘‘ भारत में आनुवंशिक तौर पर संवर्धित (जीएम) सोयाबीन के आयात को किसी भी सूरत में अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हम सरकार तक अपनी बात पहले ही पहुंचा चुके हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे शीर्ष उत्पादकों की सस्ती जीएम सोयाबीन भारत आएगी, तो घरेलू किसानों की सोयाबीन कौन खरीदेगा?’’
पाठक ने दावा किया कि अगर जीएम सोयाबीन के आयात की अनुमति दी गई, तो देश खाद्य तेल और प्रोटीन की अपनी जरूरतों के लिए इन देशों पर पूरी तरह निर्भर हो जाएगा।
सोपा के अध्यक्ष नरेश गोयनका ने कहा कि भारत अपनी आवश्यकता का 57 प्रतिशत खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है और आत्मनिर्भरता की राह में यह सबसे बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि सरकार देश में सोयाबीन की खेती को बढ़ावा देकर इस चुनौती से निपट सकती है।
गोयनका ने कहा कि खाद्य तेल और प्रोटीन के मामले में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल करने के लिए स्थिर आयात शुल्क नीति अपनाने और देश में उत्पादित गैर-जीएम सोया खली का अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रचार करने की जरूरत है।
सम्मेलन में प्रसंस्करणकर्ताओं ने उन्नत बीजों और आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर सोयाबीन की पैदावार बढ़ाने तथा देश भर में इस तिलहन फसल के रकबे में इजाफे के लिए एकीकृत नीति बनाने की मांग की।
उन्होंने शाकाहारी प्रोटीन के स्रोत के रूप में सोयाबीन की खपत को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
प्रसंस्करणकर्ताओं ने देश से निर्यात की जाने वाली सोया खली को राज्य सरकारों के वसूले जाने वाले मंडी कर से छूट देने की मांग की।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना से प्रतिस्पर्धा के लिए भारतीय सोया खली के निर्यात पर लॉजिस्टिक (माल परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन) और अन्य क्षेत्रों में पर्याप्त सरकारी प्रोत्साहन की भी मांग की।


