रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा घोटाले में सीआईडी की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसमें तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक श्वेता की संलिप्तता को लेकर कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि परीक्षा संचालन से लेकर अभ्यर्थियों के चयन तक में घोर अनियमितताएं बरती गईं और श्वेता इस सिंडिकेट की एक अहम कड़ी थीं।

परीक्षा की गोपनीयता भंग करने और संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही बरतने के बावजूद, जून 2025 में श्वेता गुप्ता की अनुशंसा पर टीडीपीएल को एल-1 प्रस्तावक के रूप में मंजूरी दी गई। तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक के अवकाश पर रहने के दौरान प्रभारी के रूप में श्वेता गुप्ता ने टीडीपीएल को अति गोपनीय परीक्षा सामग्री के प्रेषण में सहयोग किया। सरकार द्वारा उनके स्थानांतरण के आदेश दिए जाने के बावजूद, तत्कालीन अध्यक्ष ने मुख्य सचिव के पत्र को दरकिनार करते हुए पांच महीने तक फाइल रोके रखी ताकि टीडीपीएल को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके।
ओएमआर शीट और स्ट्रॉन्ग रूम में हेरफेर
जांच में यह भी पता चला कि टीडीपीएल और विथिस (WiThys) के सिंडिकेट ने किस तरह काम किया। स्ट्रॉन्ग रूम के नियमों को ताक पर रखकर ओएमआर शीट को तय समय के बाद भी स्ट्रॉन्ग रूम में जमा करने की अनुमति दी गई और निजी एजेंसियों के पास इन्हें रखने की छूट दी गई। धर्मेंद्र और अभय तिवारी के सिंडिकेट से जुड़े दस्तावेजों और मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय से जुड़े सुरागों से यह साफ हो गया कि श्वेता गुप्ता इस पूरे खेल में सीधे तौर पर शामिल थीं।


