अभिनेत्री इशिता दत्ता ने मां बनने के बाद अपनी जिंदगी में आए बदलावों और इस दौरान होने वाली परेशानियों पर खुलकर बात की है। मातृत्व का अनुभव जितना खूबसूरत होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं को शारीरिक बदलावों के साथ भावनात्मक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। इशिता ने अपनी बातचीत में इसी अनुभव के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखा है।

अभिनेत्रियों पर वजन घटाने का दबाव
इशिता दत्ता ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि फिल्म और मनोरंजन जगत में काम करने वाली महिलाओं से बच्चे के जन्म के बाद जल्द से जल्द पहले जैसी फिटनेस हासिल करने की उम्मीद की जाती है। कई बार उनके वजन और शरीर में आए बदलावों को लेकर भी चर्चा होने लगती है। इस तरह की उम्मीदें नई मांओं के लिए मानसिक दबाव बढ़ा सकती हैं। हालांकि, प्रसव के बाद हर महिला का शरीर अलग तरीके से ठीक होता है और उसे सामान्य स्थिति में लौटने के लिए अलग-अलग समय की जरूरत हो सकती है।
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग भी बनती है परेशानी
आज के दौर में अभिनेत्रियों की निजी जिंदगी और उनके शरीर में होने वाले बदलाव भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन जाते हैं। इशिता ने नई मांओं को मिलने वाली आलोचना और ट्रोलिंग जैसे मुद्दों पर भी बात की। किसी महिला के वजन या दिखने के तरीके पर टिप्पणी करना उसके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। खासकर उस समय, जब वह बच्चे की देखभाल के साथ खुद को नए हालात में ढालने की कोशिश कर रही होती है।
प्रसव के बाद भावनात्मक सेहत भी जरूरी
इशिता की बातचीत मातृत्व के उस पहलू पर ध्यान खींचती है, जिस पर अक्सर कम चर्चा होती है। बच्चे के जन्म के बाद मां को केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ होने की जरूरत नहीं होती, बल्कि भावनात्मक सहयोग भी जरूरी होता है। परिवार और समाज को नई मांओं से तुरंत पहले जैसा दिखने की उम्मीद करने के बजाय उन्हें समय और समझ देनी चाहिए। हर महिला की प्रसव के बाद की यात्रा अलग होती है और उसकी तुलना किसी दूसरी महिला से करना सही नहीं है।


