रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में हुई अनियमितता की जांच में सीआईडी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हाल ही में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते अवैध लेन-देन के लिए 10 रुपये के नोट का उपयोग कोड के रूप में करते थे। जांच में यह तथ्य सामने आया कि बिंदास एजेंसी के निदेशक अरुण कुमार की मुलाकात एल. खियांगते से उनके सरकारी आवास पर धर्मेन्द्र के माध्यम से हुई थी। इस बैठक के बाद ही जेट परीक्षा कराने का काम उक्त एजेंसी को सौंपा गया, जिसमें दो करोड़ रुपये नकद और बिल का 10 प्रतिशत कमीशन तय किया गया था।

सीआईडी चार्जशीट के मुख्य बिंदु
सीआईडी चार्जशीट में पैसे के अवैध लेन-देन की बात सामने आई है, जिसमें हवाला कारोबार में करेंसी के नंबर का प्रयोग किया जाता था। रवि के माध्यम से बिजनेस एजेंसी के अरुण कुमार की सेटिंग धर्मेन्द्र के जरिए अध्यक्ष से करवाई गई थी। 25 दिसंबर 2025 को अरुण कुमार व आनंदप्रकाश ने मिजोरम जाकर ख्यांगते को 2.5 लाख रुपये दिए थे। एयरलाइन के यात्रा विवरण व मोबाइल लोकेशन से इसकी पुष्टि हुई है। सीडीआर से पुष्टि हुई है कि पिछले दो वर्षों में अरुण कुमार की पूर्व परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से 5 बार और धर्मेन्द्र से एक बार बात हुई है। खियांगते ने वर्ष 2024 में ब्लैकलिस्टेड टीडीपीएल एजेंसी को बिना टेंडर 2025 की परीक्षाएं आयोजित करने का ठेका दिया था।


