रांची : देश के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम और ‘उद्योगों की जननी’ कहे जाने वाले हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन की अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक स्थिति को लेकर एचईसी मजदूर संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक सुनील कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में संस्थान के मौजूदा संकट, मजदूरों के अनिश्चित भविष्य और HEC के पुनरुद्धार को लेकर आगे की ठोस रणनीति पर गहन मंथन किया गया।

बैठक के दौरान संघ के महामंत्री रमा शंकर प्रसाद ने बताया कि हाल ही में संसदीय समिति ने HEC का दौरा किया है। समिति द्वारा केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सरकार के अंतिम निर्णय और रुख पर संघ पैनी नजर बनाए रखेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का अंतिम फैसला आने से पहले, एचईसी मजदूर संघ का एक प्रतिनिधिमंडल झारखंड के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेगा। संघ की कोशिश होगी कि सभी सांसद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एचईसी को बचाने के लिए एक मंच पर आएं और केंद्र सरकार के सामने संस्थान की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी पहल करें।
संघ ने सर्वसम्मति से कई अहम फैसले लिए
संसदीय समिति की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार से एचईसी के संचालन के लिए विशेष वित्तीय पैकेज और कार्यशील पूंजी जारी करने की मांग की गई है। पिछले 32 महीनों से लंबित कर्मचारियों और अधिकारियों के बकाया वेतन का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
संघ के पदाधिकारियों ने दोहराया कि HEC केवल एक कारखाना नहीं है, बल्कि यह झारखंड की पहचान और देश की औद्योगिक आत्मनिर्भरता की रीढ़ है। यदि समय रहते इसे बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हजारों परिवारों का जीवन और आजीविका संकट में पड़ जाएगी। बैठक में अध्यक्ष सुनील कुमार, महामंत्री रमा शंकर प्रसाद के अलावा विकास तिवारी, रविकांत, बसंत पल्लई, सरोज कुमार, संजय कुमार, रजनीश सहदेव, सत्य काम मानिक, मनोज कुमार प्रसाद, नरेश राम, लक्ष्मण राम सहित संघ के कई प्रमुख पदाधिकारी और मजदूर उपस्थित थे।


