बॉलीवुड में नेपोटिज्म यानी परिवारवाद को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। अब अभिनेत्री सारा अली खान ने इस विषय पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि इस चर्चा में कई बार कलाकारों के करियर के पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं दिया जाता। सारा का मानना है कि किसी फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकारों को मिलने वाली सुविधाओं की बात करना जरूरी है, लेकिन उनके काम और व्यक्तिगत प्रयासों को पूरी तरह नजरअंदाज करना भी सही नहीं है।

‘मेरे पिता मेरे लिए दफ्तरों में नहीं गए’
नेपोटिज्म पर अपनी बात रखते हुए सारा ने कहा कि वह अपनी मां के साथ रहती हैं और उनके पिता ने उनके लिए फिल्म निर्माताओं के दफ्तरों में जाकर भूमिकाएं तय नहीं कराईं। उन्होंने अपने बयान में अनुबंधों पर बातचीत करने और फिल्मों में काम दिलाने के लिए लोगों से अनुरोध करने जैसी बातों का भी जिक्र किया। सारा के इस बयान का आशय यह था कि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद उन्हें अपने करियर में खुद भी प्रयास करने पड़े हैं।
परिवार से मिली पहचान को भी स्वीकार किया
सारा अली खान फिल्मी परिवार से आती हैं और उनके माता-पिता दोनों ही मनोरंजन जगत से जुड़े रहे हैं। अभिनेत्री ने अपने परिवार की विरासत से मिलने वाले फायदे को पूरी तरह नकारने के बजाय इस विषय पर संतुलित नजरिया रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि नेपोटिज्म शब्द अब नकारात्मक अर्थ में इस्तेमाल होने लगा है। उनके अनुसार, इस बहस में कलाकार की मेहनत और उसकी अपनी पहचान बनाने की कोशिश को भी जगह मिलनी चाहिए।
बॉलीवुड में फिर चर्चा में आया परिवारवाद
सारा के बयान के बाद बॉलीवुड में स्टार किड्स, अवसरों की समानता और प्रतिभा को लेकर चलने वाली बहस फिर चर्चा में आ सकती है। नेपोटिज्म के आलोचकों का कहना है कि फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों को शुरुआती मौके आसानी से मिल जाते हैं, जबकि बाहरी कलाकारों को संघर्ष करना पड़ता है। दूसरी ओर, सारा जैसे कलाकार व्यक्तिगत मेहनत और काम के आधार पर मूल्यांकन किए जाने की बात करते हैं। इस बहस में दोनों पहलुओं पर चर्चा होती रही है।


