झारखंड की गिरिडीह विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव राज्य की राजनीति में बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। पूर्व विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के असमय निधन के बाद झामुमो जहां सहानुभूति की लहर पर सवार होकर अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं भारतीय जनता पार्टी इस खोई हुई सीट पर दोबारा कब्जा जमाने के लिए संगठन को नए सिरे से साध रही है। लेकिन इस मुख्य मुकाबले के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के अध्यक्ष जयराम कुमार महतो उर्फ ‘टाइगर जयराम’ सबसे बड़े एक्स-फैक्टर बनकर उभरे हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में झामुमो के सुदिव्य कुमार सोनू ने भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 3838 वोटों (1.85%) के अंतर से हराया था। उस चुनाव में जेएलकेएम उम्मीदवार को 10787 वोट (5.19%) मिले थे। चूंकि जीत का अंतर काफी कम था, इसलिए इस बार जेएलकेएम जिस पाले के वोट काटेगी, परिणाम उसी के पक्ष या विपक्ष में जा सकता है।

भाजपा की रणनीति क्या है
भाजपा सामान्य वर्ग और ओबीसी समुदाय के बीच मजबूत रही है। हालांकि, पीरटांड़ के आदिवासी बहुल बूथों पर पार्टी पिछले दो विधानसभा चुनाव से पिछड़ रही है। इसे देखते हुए इस बार भाजपा अपने आधार वोटबैंक को बंटने से रोकने और आदिवासी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने पर ध्यान दे रही है। पार्टी की ओर से वैश्य समुदाय को भी एकजुट रखने की योजना है। बीते दिनों हुई भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की मांग उठाकर पार्टी ने इस दिशा में पहल की है। पीरटांड़ में बढ़त के लिए भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को सक्रिय करने की योजना बनाई है। संताल आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में दोनों नेता छठ के बाद प्रचार करेंगे। गिरिडीह उपचुनाव के लिए किसी प्रदेश महामंत्री को भी प्रभारी बनाया जाएगा। इसके साथ सह संगठन प्रभारी सौरभ सिंह भी त्योहार के बाद वहां कैंप करेंगे। कार्यसमिति की बैठक में शामिल राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उपचुनाव में जीत के लिए ठोस योजना बनाने की सलाह दी है। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह अपने सप्ताह भर के प्रवास के दौरान गिरिडीह में भाजपा कार्यकर्ताओं से मिल चुके हैं। चुनाव हार चुके एक पूर्व प्रत्याशी से उन्होंने कहा कि गिरिडीह पार्टी की जीती हुई सीट थी, जिसे बरकरार नहीं रखा जा सका। उन्होंने कार्यकर्ताओं से उपचुनाव में जीत के लिए पूरी मेहनत करने की अपील की।
झामुमो की ओर से दिवंगत विधायक की पत्नी श्वेता शर्मा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है, जिन्हें जनसमर्थन और सहानुभूति का फायदा मिलने की उम्मीद है। उनके पक्ष में जमीन तैयार करने के लिए गांडेय विधायक कल्पना सोरेन गिरिडीह में जमी हुई हैं। गिरिडीह में लेदा स्थित छठ घाट का निरीक्षण करने से लेकर लोगों की समस्याएं सुनकर उनके समाधान का आश्वासन देने के अलावा कल्पना सोरेन यहां पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नया जोश भरने का काम कर रही हैं। झामुमो की रणनीति इस सीट को लेकर साफ है कि उन्हें बूथ लेवल पर मैनेजमेंट करना है, बूथ जीते तो सीट जीते की रणनीति पर झामुमो चल रहा है। चूंकि यह सीट झामुमो की सीटिंग सीट रही है इसलिए पार्टी यह मानकर चल रही है कि पूर्व मंत्री सुदिव्य सोनू के निधन के बाद से उपजी सहानुभूति और जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं का साथ उनके लिए बेहतर रिजल्ट लेकर आयेगा।
दूसरी ओर, भाजपा के सामने उम्मीदवार के चयन से लेकर आंतरिक गुटबाजी और नए मतदाताओं को जोड़ने तक की चुनौतियां हैं। पूर्व विधायक निर्भय शाहाबादी और रवींद्र राय जैसे नाम दावेदारों की दौड़ में शामिल हैं। गिरिडीह उपचुनाव के नतीजों में भाजपा की सहयोगी आजसू पार्टी का रुख भी बेहद निर्णायक होगा। सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी की सक्रियता और पीरटांड़ में हुए आजसू के हालिया कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद, दोनों दलों का आपसी तालमेल और वोट ट्रांसफर क्षमता चुनावी परिणाम को सीधा प्रभावित कर सकती है। कुल मिलाकर गिरिडीह उपचुनाव बीजेपी और जेएमएम के बीच आमने-सामने का मुकाबला नहीं होने जा रहा है। डुमरी के विधायक जयराम महतो थर्ड मोर्चा के तौर पर काम करने के मूड में हैं।


