रांची : रांची गौशाला न्यास में शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सीएसआईआर, भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक एवं कॉमनवेल्थ फेलो तथा पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पी. शन्मुगम ने बीआईटी मेसरा के प्रो. राजीवके साथ गौशाला का दौरा किया। बैठक में गौशाला परिसर में 20 टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता वाले बायो-सीएनजी (बायोगैस) संयंत्र की स्थापना के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की गई। डॉ. शन्मुगम ने कहा कि भारत सरकार स्वच्छ एवं सतत वैकल्पिक ईंधन के रूप में बायो-सीएनजी को बढ़ावा देने के लिए विशेष रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि देशभर में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना हेतु भारत सरकार द्वारा लगभग ₹23,000 करोड़ की योजना प्रस्तावित की गई है।

उन्होंने प्रस्तावित परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह परियोजना न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम होगी बल्कि यह कचरे से संपदा (Waste to Wealth) और सतत विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹20 करोड़ है। इससे अनुमानित आय प्रतिदिन लगभग ₹2 लाख रुपये होगी। गौशाला के गोबर एवं जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन (CBG) और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का उत्पादन किया जायेगा।इस परियोजना से रांची गौशाला न्यास आत्मनिर्भर बनेगा और समाज की और अधिक प्रभावी सेवा कर सकेगा। यह झारखंड राज्य में इस प्रकार की पहली परियोजनाहोगी।

बैठक में निर्णय लिया गया कि सीएसआईआर द्वारा इस परियोजना के लिए कॉन्सेप्ट नोटतैयार किया जाएगा। इसके पश्चात रांची गौशाला न्यास द्वारा विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। इस अवसर पर रांची गौशाला न्यास के अध्यक्ष पुनीत कुमार पोद्दार, मंत्री प्रदीप राजगढ़िया, उपाध्यक्ष एस एन राजगढ़िया, कोषाध्यक्ष दीपक पोद्दार, सह सचिव सुरेश जैन,मनीष लोधा,अमित चौधरी एवं सदस्यगण उपस्थित थे।


