वेब सीरीज ‘पंचायत’ में विकास का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता चंदन रॉय इन दिनों अपनी शॉर्ट फिल्म ‘आखिरी राइड’ को लेकर चर्चा में हैं. अनुराग कश्यप और वासन बाला द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म में वह मुंबई के एक कैब ड्राइवर की भूमिका निभा रहे हैं. फिल्म में उनके किरदार के जरिए शहर की मुश्किल जिंदगी और आम लोगों के संघर्ष को दिखाया गया है. इसी बीच अभिनेता ने अपने शुरुआती दिनों और मुंबई तक पहुंचने के सफर को याद किया है.

बिहार के छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर
बिहार के महनार गांव से ताल्लुक रखने वाले चंदन रॉय को बचपन से ही अभिनय का शौक था. स्कूल के दिनों से ही वह फिल्मों और एक्टिंग की दुनिया में जाना चाहते थे. लेकिन छोटे शहर में रहने और सीमित संसाधनों के कारण उनके लिए इस दिशा में आगे बढ़ना आसान नहीं था. उस दौर में इंटरनेट की सुविधा भी नहीं थी. ऐसे में वह अखबारों में छपी खबरों और फिल्मी दुनिया से जुड़ी जानकारियों के जरिए अपने सपनों को समझने की कोशिश करते थे.

एक्टिंग के करीब रहने के लिए चुनी पत्रकारिता
हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में चंदन ने बताया कि उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई इसलिए चुनी, क्योंकि उन्हें लगता था कि मीडिया के जरिए वह कैमरे, लाइट, माइक्रोफोन और बॉलीवुड की दुनिया के करीब रह सकेंगे. उन्होंने कहा कि उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे और न ही कोई ऐसा व्यक्ति था जो उन्हें सही दिशा दिखा सके. इसलिए उस समय उन्हें मास कम्युनिकेशन सबसे बेहतर विकल्प लगा.
नौ साल पहले छोटे सूटकेस के साथ पहुंचे थे मुंबई
चंदन ने बताया कि मुंबई आए उन्हें नौ साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी उनके अंदर काम करने का वही जुनून है, जो शुरुआती दिनों में था. उन्होंने याद किया कि जब वह एक छोटे से सूटकेस के साथ मुंबई आए थे, तब भी उनके मन में मेहनत करके अपना नाम बनाने का सपना था. आज भी हर सुबह वह उसी ऊर्जा के साथ उठते हैं.
संघर्ष ने बनाया मजबूत अभिनेता
चंदन का कहना है कि बिहार के छोटे शहर में पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने बचपन से मेहनत करना सीखा. मुंबई में भी वह इसी सोच के साथ काम कर रहे हैं. ‘पंचायत’ के विकास के रूप में मिली लोकप्रियता के बाद अब ‘आखिरी राइड’ में उनका अलग अंदाज देखने को मिल रहा है. पत्रकारिता से अभिनय तक का उनका सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं.


