बुंडू: आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता के प्रतीक सोहराई जतरा को लेकर ग्राम बानाबुरु में तैयारियां शुरू हो गई हैं। 12 नवंबर को ग्राम बानाबुरु के जतरा टांड़ में सोहराई जतरा का आयोजन किया जाएगा। जतरा को सफल, व्यवस्थित और भव्य रूप देने के उद्देश्य से मंगलवार को ग्राम बानाबुरु के ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता श्री कुलदीप सिंह मुंडा ने की।

बैठक में जतरा के आयोजन, व्यवस्थाओं और संचालन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से मेला समिति का नाम सोहराई जतरा संचालन समिति बानाबुरु निर्धारित किया। इसके साथ ही जतरा के सफल संचालन, व्यवस्थाओं की देखरेख और आयोजन को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए समिति के पदाधिकारियों का चुनाव भी किया गया।

बैठक में सर्वसम्मति से एतवा उरांव को समिति का अध्यक्ष, शनिचरवा उरांव को कोषाध्यक्ष तथा ज्योति लकड़ा को उपाध्यक्ष चुना गया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को जतरा के सफल आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई। समिति के गठन के साथ ही ग्रामीणों में सोहराई जतरा को लेकर उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिल रहा है।
विधायक विकास कुमार मुंडा समेत कई गणमान्य अतिथि होंगे शामिल
सोहरई जतरा संचालन समिति की ओर से जानकारी दी गई कि इस वर्ष आयोजित होने वाले सोहरई जतरा में मुख्य अतिथि के रूप में तमाड़ विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक विकास कुमार मुंडा, डॉ. बासवी किड़ो तथा अजय तिर्की शामिल होंगे। गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति से जतरा की गरिमा और उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।
आदिवासी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है जतरा
ग्रामीण जीवन में जतरा केवल मनोरंजन या मेले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मेल-मिलाप, सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामुदायिक एकजुटता का महत्वपूर्ण अवसर भी माना जाता है। सोहराई जतरा के माध्यम से ग्रामीण अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को भी मजबूत करते हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पंचपरगना वासियों से शामिल होने की अपील
ग्राम बानाबुरु के ग्रामीणों एवं सोहरई जतरा संचालन समिति ने बुंडू अनुमंडल सहित तमाड़, सोनाहातू, राहे, सिल्ली और पूरे पंचपरगना क्षेत्र के लोगों से 12 नवंबर को आयोजित सोहरई जतरा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। ग्रामीणों ने सभी लोगों से पारंपरिक जतरा में पहुंचकर मेले का आनंद लेने, आपसी मेल-मिलाप बढ़ाने और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने का आग्रह किया है।


