
चंडीगढ़ : आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर सियासी हलचल तेज है और पार्टी नेतृत्व की सबसे बड़ी चिंता राघव चड्ढा नहीं, बल्कि संदीप पाठक को लेकर बताई जा रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, जहां राघव चड्ढा को एक ‘ग्लैमरस चेहरा’ माना जाता है, वहीं संदीप पाठक संगठन की जमीनी रणनीति के मुख्य स्तंभ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि चड्ढा के इस दावे कि उन्हें 63 विधायकों के एक हिस्से का समर्थन हासिल है से पार्टी नेतृत्व खास चिंतित नहीं है। शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर दलबदल की संभावना कम है। उल्टा, इस तरह के दावे विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में काम करने की ज्यादा स्वतंत्रता दे सकते हैं।
दरअसल, कई विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों के अलावा दो और शक्ति केंद्र सक्रिय हैं हल्का इंचार्ज और केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े संगठन के प्रतिनिधि। ऐसे में कई विधायक निजी तौर पर ‘अत्यधिक नियंत्रण और दबाव’ को लेकर असंतोष जताते रहे हैं। अब जब पार्टी अपने विधायकों को साथ बनाए रखने की कोशिश कर रही है, तो संभावना है कि उन्हें कुछ हद तक अधिक स्वतंत्रता दी जाए। इसके साथ ही, संभावित दलबदल रोकने के लिए पार्टी अपने मौजूदा विधायकों को बड़े पैमाने पर बदलने की योजना में भी बदलाव कर सकती है।
दूसरी ओर, भाजपा के लिए संदीप पाठक को ज्यादा अहम माना जा रहा है, खासकर तब जब पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। 2022 के चुनाव से पहले पार्टी का संगठन खड़ा करने में पाठक की बड़ी भूमिका रही थी।
उन्हें संगठन की बारीकियों, उसकी संरचना और मजबूती के आधारों की गहरी समझ है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि वे दूसरी तरफ जाते हैं, तो वही संगठनात्मक ढांचा भाजपा के चुनावी अभियान को मजबूत करने में इस्तेमाल हो सकता है।

