
दयानंद राय
पत्रकारिता में मुझे 22 साल हो गए। इन 22 वर्षों में जहां तक मुझे याद है कि करीब छह सालों से मैं झामुमो महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांडेय के संपर्क में रहा हूं। जब मैं आजाद सिपाही में बतौर चीफ रिपोर्टर काम कर रहा था तो अक्सर उनसे बात होती थी, कई दफा खबरों को लेकर और कई बार यूं ही हाल-चाल पूछने तक। उसके बाद मैंने कई संस्थान बदले और मेरी प्रोफाइल भी बदलती गयी लेकिन उनमें कोई बदलाव नहीं दिखा।
हर बार मुझे उनमें एक विनम्र राजनीतिज्ञ नजर आया। जब भी फोन किया तो उनका ये कहना, क्या बॉस क्या हाल है? उनकी इस चिरपरिचित शैली का मैं कायल हूं। उनके क्या बॉस कहने से राज्य के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती की स्मृति भी मानस पटल पर कौंधने लगती थी वे भी क्या बॉस कहकर बातें करते थे। विनोद जी इस बाबत खास हैं कि उन्होंने अपनी सफलता को पचा लिया है, उसे दिमाग में चढ़ने नहीं दिया है। कई दफा ऐसा होता है कि कुछ लोग राजनीति में जगह बना रहे ही होते हैं और एक किस्म का अहं उनमें आ जाता है। ऐसा कुछ भी मुझे विनोद पांडेय जी में दिखाई नहीं दिया। राजनीतिक बयानों में भी शब्दों की मर्यादा का वे पालन करते दिखे। लंबे संपर्क काल में उनके कई प्रेस रीलिज मेरी आंखों के सामने से गुजरे हैं, कई बार उन्हें पार्टी का पक्ष रखते देखा है और हर बार यही महसूस हुआ कि विनोद जी अपने हाई प्रोफाइल व्यक्तित्व के साथ जमीनी स्तर पर लोगों और कार्यकर्ताओं से तालमेल बिठाना अच्छी तरह जानते हैं।
राजनीतिक ऊंचाई हासिल करने के बाद भी वे लोगों के साथ सरलता और सहजता से पेश आते हैं। आज विनोद पांडेय जी का जन्मदिन है, ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी राजनीतिक पारी लंबी और उल्लेखनीय हो साथ ही उनकी लोकप्रियता बरकरार रहे।

