संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु के लिए मातृशक्ति की अटूट आस्था का पर्व है अहोई अष्टमी : संजय सर्राफ

अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को मनाया जाएगा। माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना से अहोई माता की पूजा करेंगी।

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रांची : झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में मां और संतान का रिश्ता प्रेम, त्याग, समर्पण एवं अटूट विश्वास का प्रतीक माना गया है। इसी मातृभावना और संतान के कल्याण की मंगलकामना को समर्पित है अहोई अष्टमी का पावन पर्व। यह पर्व माताओं की श्रद्धा, तपस्या और संतान के प्रति उनके निःस्वार्थ प्रेम को अभिव्यक्त करता है। हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। इस वर्ष अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर दिन रविवार को मनाया जाएगा। यह पर्व दीपावली से लगभग आठ दिन पूर्व और करवा चौथ के चार दिन बाद आता है।अहोई अष्टमी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य की कामना से व्रत रखती हैं। परंपरागत रूप से यह व्रत पुत्रों के कल्याण के लिए किया जाता था, लेकिन वर्तमान समय में माताएं पुत्र-पुत्रियों सहित अपनी समस्त संतानों के सुखमय जीवन के लिए यह व्रत करती हैं। यह पर्व मां के वात्सल्य और पारिवारिक संस्कारों की सुंदर अभिव्यक्ति है।अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं। अनेक महिलाएं सूर्योदय से लेकर तारों के दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं। संध्याकाल में घर की दीवार पर गेरू से अहोई माता का चित्र बनाया जाता है अथवा उनके चित्र की स्थापना की जाती है। माता के चित्र के साथ स्याहू और उसके बच्चों का चित्रण भी किया जाता है।पूजा में रोली, चावल, पुष्प, दीपक, मिठाई और जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद अहोई माता की व्रत कथा सुनी जाती है। तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में पूजा-विधि और पारण की परंपराओं में अंतर भी देखने को मिलता है।लोककथा के अनुसार, एक साहूकार की पत्नी जंगल में मिट्टी खोदते समय अनजाने में स्याहू के एक बच्चे को चोट पहुंचा देती है, जिससे उसके सातों पुत्रों पर संकट आ जाता है। पुत्र-वियोग से दुखी माता अहोई माता की श्रद्धापूर्वक आराधना करती है। उसकी सच्ची भक्ति और पश्चाताप से प्रसन्न होकर माता उसे संतान सुख का आशीर्वाद देती हैं। तभी से अहोई माता की पूजा और व्रत की परंपरा प्रचलित हुई। अहोई अष्टमी केवल उपवास और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि संतान के प्रति माता के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व परिवार में सुख, शांति, सद्भाव और संस्कारों को मजबूत करने का संदेश देता है। अहोई माता की आराधना के माध्यम से माताएं अपनी संतानों के मंगलमय जीवन की कामना करती हैं और परिवार की खुशहाली के लिए ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करती हैं।

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Avantika Raj Choudhary एक अनुभवी और बहुआयामी पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का समृद्ध अनुभव प्राप्त है। इस दौरान उन्होंने एंकरिंग, रिपोर्टिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग और वेबसाइट संचालन जैसे मीडिया के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। खबरों की गहरी समझ, प्रभावशाली प्रस्तुति और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ सामने लाने की उनकी क्षमता उन्हें एक सशक्त मीडिया प्रोफेशनल बनाती है।अपने करियर के दौरान Avantika ने Jharkhand Live, The Fourth Pillar, 22 Scope और Khabar Mantra जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया है, जहाँ उन्होंने अपनी पेशेवर दक्षता, मेहनत और रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। एंकर के रूप में उनकी प्रभावशाली संवाद शैली, रिपोर्टर के रूप में जमीनी हकीकत को सामने लाने की क्षमता, और स्क्रिप्ट राइटर के रूप में सटीक एवं आकर्षक लेखन ने उन्हें मीडिया जगत में एक अलग पहचान दिलाई है।डिजिटल और ग्राउंड मीडिया दोनों प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करने का अनुभव रखने वाली Avantika Raj Choudhary पत्रकारिता के बदलते स्वरूप के साथ खुद को निरंतर अपडेट करती रही हैं। उनकी कार्यशैली में निष्पक्षता, समर्पण और दर्शकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से झलकता है। मीडिया इंडस्ट्री में उनका यह अनुभव और कौशल उन्हें भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियों की ओर अग्रसर करता है.