अक्षय कुमार की फिल्म में भेड़ियों नहीं, आदमखोर बाघों का होगा सामना! भूमि पेडनेकर की एंट्री, जिम कॉर्बेट से प्रेरित होगी कहानी

Manu Shrivastava
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बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार एक बार फिर निर्देशक प्रियदर्शन के साथ काम करने जा रहे हैं. उनकी आगामी फिल्म में अभिनेत्री भूमि पेडनेकर की भी एंट्री हो गई है. यह फिल्म 1960 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित कॉमेडी थ्रिलर होगी. हालांकि, इसकी कहानी में सिर्फ हंसी-मजाक ही नहीं, बल्कि रोमांच, जंगल और वन्यजीव संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय भी देखने को मिलेंगे. फिल्म का निर्माण टिप्स फिल्म्स के बैनर तले रमेश तौरानी कर रहे हैं.

जिम कॉर्बेट से प्रेरित शिकारी बनेंगे अक्षय कुमार

फिल्म में अक्षय कुमार एक ऐसे शिकारी और ट्रैकर की भूमिका निभाएंगे, जिसका किरदार प्रसिद्ध शिकारी और वन्यजीव संरक्षणवादी जिम कॉर्बेट से प्रेरित होगा. कहानी में उनका किरदार शुरुआत में अपने गांव को आदमखोर बाघों और तेंदुओं से बचाने के लिए उनका शिकार करता है. लेकिन समय के साथ उसकी सोच में बदलाव आता है. वह जंगल और वन्यजीवों के महत्व को समझने लगता है और संरक्षण की दिशा में काम करने का फैसला करता है.

शिकार से संरक्षण तक दिखेगा किरदार का सफर

फिल्म की कहानी में एक ऐसे व्यक्ति का सफर दिखाया जाएगा, जिसकी जिंदगी में परिस्थितियों के साथ बड़ा बदलाव आता है. शुरुआत में वह गांव के लोगों की सुरक्षा के लिए खतरनाक जानवरों का शिकार करता है. लेकिन बाद में उसे एहसास होता है कि जंगल और वन्यजीवों का संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है. फिल्म में अवैध शिकार और जंगलों की कटाई जैसे गंभीर मुद्दों को भी उठाया जाएगा. इसके जरिए दर्शकों को प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा का संदेश देने की कोशिश होगी.

राजस्थान और गुजरात के जंगलों में होगी शूटिंग

निर्माता इस फिल्म को पूरी तरह जंगलों में शूट करने की योजना बना रहे हैं. इसके लिए राजस्थान और गुजरात में लोकेशन की तलाश की जाएगी. फिल्म का प्री-प्रोडक्शन अक्टूबर 2026 से शुरू होने की योजना है, जबकि शूटिंग जनवरी 2027 में शुरू हो सकती है. जंगलों के प्राकृतिक वातावरण में फिल्मांकन होने से कहानी को वास्तविकता के करीब दिखाने में मदद मिलेगी.

कौन थे जिम कॉर्बेट?

जिम कॉर्बेट का जन्म नैनीताल में एडवर्ड जेम्स कॉर्बेट के नाम से हुआ था. वह ब्रिटिश मूल के शिकारी और ट्रैकर थे. उन्होंने उत्तर भारत में कई आदमखोर बाघों और तेंदुओं का शिकार किया था, जो ग्रामीण इलाकों में लोगों के लिए खतरा बन चुके थे. बाद के वर्षों में उनका झुकाव वन्यजीव संरक्षण की ओर हुआ. भारत के पहले राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है. इस उद्यान का नाम पहले हैली नेशनल पार्क था, जिसे 1957 में उनके सम्मान में जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क कर दिया गया. अक्षय की आगामी फिल्म इसी बदलाव और वन्यजीव संरक्षण की भावना को पर्दे पर पेश कर सकती है.

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