“मां बनना एक कभी न खत्म होने वाली जिम्मेदारी है” : अमृता राव ने साझा किए मदरहुड के अनुभव

Manu Shrivastava
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अमृता राव मदरहुड
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फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ में नजर आ चुकी अभिनेत्री अमृता राव का मानना है कि मां बनना जीवन का सबसे बड़ा और निरंतर चलने वाला अनुभव है। हाल ही में एक लाइफस्टाइल इवेंट के दौरान उन्होंने मदरहुड, पैरेंटिंग और अपने निजी अनुभवों पर खुलकर बात की। अमृता ने कहा कि बचपन में मदर्स डे का मतलब सिर्फ मां को शुभकामनाएं देना और उनके लिए एक छोटा-सा नोट बनाना होता था, लेकिन मां बनने के बाद इस दिन का महत्व पूरी तरह बदल जाता है।

उनके अनुसार, जब कोई महिला मां बनती है, तब उसे एहसास होता है कि यह एक ऐसी जिम्मेदारी है जो कभी खत्म नहीं होती। यह एक नॉन-स्टॉप सफर है, जो जीवनभर चलता रहता है और हर दिन नई चुनौतियों व नई सीखों से भरा होता है।

हर दिन कुछ नया सिखाता है मदरहुड

अमृता राव और उनके पति आर.जे. अनमोल वर्ष 2020 में बेटे वीर के माता-पिता बने थे। दोनों अक्सर अपने बेटे के साथ बिताए गए खूबसूरत पलों को सोशल मीडिया के जरिए प्रशंसकों के साथ साझा करते रहते हैं।

मदरहुड के अपने अनुभवों के बारे में बात करते हुए अमृता कहती हैं कि माता-पिता बनने के बाद सीखने की प्रक्रिया कभी नहीं रुकती। हर दिन कुछ नया सिखाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि बच्चों की परवरिश कई बार बेहद थकाने वाली होती है, लेकिन इसके साथ मिलने वाला संतोष और खुशी भी उतनी ही खास होती है।

ऑनलाइन सलाह से ज्यादा मायने रखता है अनुभव

अमृता ने बताया कि मां बनने से पहले उन्होंने यूट्यूब पर कई वीडियो देखे और दूसरे माता-पिता के अनुभवों को समझने की कोशिश की। हालांकि उनका मानना है कि वास्तविक अनुभव किसी भी सलाह से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि पैरेंटिंग एक नए खेल की तरह है, जिसे हर व्यक्ति अपने तरीके से सीखता है। यही कारण है कि वह अपने अनुभवों को भी अन्य माता-पिता के साथ साझा करना चाहती हैं।

ब्रेस्टफीडिंग को लेकर समाज में बदलाव जरूरी

ब्रेस्टफीडिंग के विषय पर अमृता ने खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यह जानकर उन्हें निराशा होती है कि आज भी कई जगहों पर इसे वर्जित विषय माना जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत में सोच और सामाजिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। सौभाग्य से उनके परिवार में इस विषय को हमेशा सामान्य और स्वाभाविक नजरिए से देखा गया, जिससे उन्हें काफी सहयोग मिला।

अमृता का मानना है कि मातृत्व सिर्फ एक भूमिका नहीं, बल्कि जीवनभर चलने वाली सीख, जिम्मेदारी और प्रेम का अनमोल सफर है।

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