‘सिर्फ 7 मिनट के रोल ने बदल दी किस्मत’: अमृता राव ने सुनाया ‘विवाह’ मिलने का दिलचस्प किस्सा

Manu Shrivastava
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अमृता राव
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बॉलीवुड अभिनेत्री अमृता राव आज भी फिल्म ‘विवाह’ में निभाए गए पूनम के किरदार के लिए दर्शकों के दिलों में खास जगह रखती हैं। उनकी सादगी, मासूमियत और सहज अभिनय ने इस किरदार को हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार पात्रों में शामिल कर दिया। हालांकि, अमृता को कभी उम्मीद नहीं थी कि उन्हें यह प्रतिष्ठित भूमिका मिलेगी।

छोटे से रोल ने छोड़ी बड़ी छाप

हाल ही में एक बातचीत के दौरान अमृता राव ने खुलासा किया कि निर्देशक सूरज बड़जात्या ने उन्हें फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ में उनके छोटे से किरदार को देखकर ‘विवाह’ के लिए चुना था। अभिनेत्री ने बताया कि उस फिल्म में उनका स्क्रीन टाइम करीब सात मिनट का था, इसलिए उन्हें यह विश्वास ही नहीं था कि इतना छोटा रोल किसी बड़े निर्देशक का ध्यान आकर्षित कर सकता है।

पहली मुलाकात का मजेदार अनुभव

अमृता ने सूरज बड़जात्या से अपनी पहली मुलाकात का किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह उनसे मिलने गईं, तो उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि निर्देशक उन्हें किस तरह के किरदार में देख रहे हैं। इसी वजह से वह एक आधुनिक मुंबई की लड़की की तरह जींस और टी-शर्ट पहनकर पहुंचीं। बाद में उन्हें पता चला कि सूरज बड़जात्या उन्हें एक छोटे शहर की सरल और संस्कारी लड़की ‘पूनम’ के रूप में देख रहे थे।

भावुक कर देने वाला पल

अभिनेत्री ने बताया कि मुलाकात के दौरान सूरज बड़जात्या ने कहा कि उन्हें अमृता का एक किरदार बेहद पसंद आया था। पहले उन्हें लगा कि निर्देशक उनकी किसी हिट फिल्म की बात कर रहे हैं, लेकिन जब उन्होंने ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ का नाम लिया तो वह हैरान रह गईं। यह जानकर अमृता बेहद भावुक हो गईं कि इतने छोटे से रोल ने भी निर्देशक पर गहरी छाप छोड़ी थी।

आज भी कायम है ‘पूनम’ का जादू

सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी ‘विवाह’ में अमृता राव और शाहिद कपूर की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। फिल्म में पूनम का किरदार आज भी सादगी और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक माना जाता है, जिसकी लोकप्रियता वर्षों बाद भी बरकरार है।

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