
ग्रेसी सिंह उन अभिनेत्रियों में शुमार हैं जिन्होंने अपनी सादगी, सहज अभिनय और मजबूत किरदारों के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। साल 2001 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘लगान’ ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया था। आमिर खान के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया और उनके द्वारा निभाया गया गौरी का किरदार आज भी याद किया जाता है। उनकी मासूमियत और स्वाभाविक अभिनय ने उन्हें उस दौर की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।
टीवी से फिल्मों तक का शानदार सफर
20 जुलाई 1980 को जन्मीं ग्रेसी सिंह ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 1997 में टीवी सीरियल ‘अमानत’ से की थी। छोटे पर्दे पर पहचान बनाने के बाद उन्हें निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘लगान: वन्स अपॉन ए टाइम इन इंडिया’ में काम करने का मौका मिला। यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही, बल्कि ऑस्कर तक पहुंचने वाली भारतीय फिल्मों में भी शामिल हुई। फिल्म की सफलता ने ग्रेसी सिंह को बॉलीवुड में एक नई पहचान दिलाई।
सफल फिल्मों के बाद भी नहीं टिक सकी चमक
‘लगान’ की सफलता के बाद ग्रेसी सिंह ने ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’, ‘गंगाजल’ और ‘अरमान’ जैसी फिल्मों में काम किया। जहां मुन्ना भाई एमबीबीएस और गंगाजल बड़ी हिट साबित हुईं, वहीं अरमान दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। इसके बाद उनकी कई फिल्में लगातार फ्लॉप होती गईं, जिससे उनके करियर की रफ्तार धीमी पड़ गई।
क्षेत्रीय सिनेमा में भी आजमाई किस्मत
बॉलीवुड में सफलता कम होने के बाद ग्रेसी सिंह ने तमिल, तेलुगू, मलयालम, पंजाबी, गुजराती और बंगाली फिल्मों में भी काम किया। हालांकि, क्षेत्रीय सिनेमा में भी उन्हें वह पहचान और सफलता नहीं मिल सकी जिसकी उम्मीद थी। धीरे-धीरे उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। आज ग्रेसी सिंह भले ही फिल्मी दुनिया से दूर हों, लेकिन ‘लगान’ और ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ जैसी फिल्मों में उनके शानदार अभिनय को दर्शक आज भी याद करते हैं।

