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दिल्ली के पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती की अपील सेशन कोर्ट से खारिज, न्यायिक हिरासत में भेजे गए

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नई दिल्ली: दिल्ली की राऊज एवेन्यू सेशन कोर्ट ने 2016 में एम्स (दिल्ली) के सिक्योरिटी गार्ड से मारपीट के मामले में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से दोषी करार दिए गए पूर्व मंत्री और आप विधायक सोमनाथ भारती की अपील को खारिज कर दिया है।

स्पेशल जज विकास धूल ने सोमनाथ भारती को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश के मुताबिक जेल भेजने का आदेश दिया, जिसके बाद उन्हें तत्काल न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।

पिछले 15 मार्च को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सेशन कोर्ट ने 42 पन्नों के आदेश में सोमनाथ भारती को एम्स की दीवार तोड़ने के मामले में प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 3(1) के तहत दोषी करार देने के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश पर मुहर लगाई है।

सेशन कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 353 के तहत दोषी करार देने के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश को निरस्त कर दिया है।

सेशन कोर्ट ने सोमनाथ भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 147 और 149 के तहत मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के दोषी करार देने के आदेश को बरकरार रखते हुए जेल भेजने का आदेश दिया है।

एडिशनल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार पांडेय ने 22 जनवरी को सोमनाथ भारती को इस मामले में दोषी ठहराया था और 23 जनवरी को सजा सुनाई थी।

सेशन कोर्ट ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट से सुनाई गई दो साल की कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा पर 28 जनवरी को रोक लगा दी थी। सेशन कोर्ट ने सोमनाथ भारती को बीस हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी थी।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने इस मामले के दूसरे आरोपितों जगत सैनी, दिलीप झा, संदीप सोनू और राकेश पांडेय को बरी कर दिया था।

कोर्ट ने सोमनाथ भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 353, 147 और 149 के अलावा प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 3 के तहत दोषी पाया है।

यह घटना 9 सितम्बर, 2016 की है। एम्स के मुख्य सुरक्षा अधिकारी आरएस रावत ने 10 सितम्बर, 2016 को एफआईआर दर्ज कराई थी।

आरएस रावत की शिकायत में कहा गया था कि 9 सितम्बर की सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर सोमनाथ भारती अपने करीब तीन सौ समर्थकों के साथन नाला रोड के पास गौतम नगर में एम्स की बाउंड्री वाल को जेसीबी से तोड़ने लगे।

जब एम्स के सुरक्षा अधिकारियों ने सोमनाथ भारती को मना किया तो उन्होंने कहा कि ये सार्वजनिक संपत्ति है।

इस बाबत जब उनसे कागजात मांगे गए तो वे कोई कागजात नहीं दिखा पाए और सुरक्षाकर्मियों के साथ बदतमीजी औऱ हाथापाई करने लगे। इसमें कुछ सुरक्षाकर्मियों को हल्की चोटें भी आईं।

एफआईआर के मुताबिक सोमनाथ भारती के साथ भीड़ ने बाउंड्री वाल पर लगे कंटीले तारों को हटा दिया।

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 186, 353, 323,147 और प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 3 के तहत चार्जशीट दाखिल की।

कोर्ट ने सभी आरोपितों के खिलाफ 20 नवंबर, 2018 को धारा 323, 353, 147, 149 के तहत चार्जशीट पर संज्ञान लिया। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने 19 गवाहों के बयान दर्ज करवाए थे।

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