
1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी को एक बार फिर बड़े पर्दे पर जीवंत करने के लिए निर्देशक राजकुमार संतोषी और अभिनेता सनी देओल फिल्म ‘बंटवारा’ लेकर आ रहे हैं। मुंबई में आयोजित ट्रेलर लॉन्च के दौरान फिल्म की पूरी टीम ने इसके संदेश और उद्देश्य पर खुलकर बात की। यह फिल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और विभाजन से जुड़ी अनसुनी कहानियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
धर्मेंद्र का मिला आशीर्वाद, इंसानियत का संदेश देगी फिल्म
राजकुमार संतोषी ने बताया कि फिल्म पर धर्मेंद्र का विशेष आशीर्वाद रहा। उन्होंने फिल्म की कहानी सुनने के बाद भावुक होकर पूरी टीम को शुभकामनाएं दी थीं। संतोषी ने कहा कि यह फिल्म प्रसिद्ध साहित्यकार असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नहीं देख्या ओ जम्या ही नहीं’ से प्रेरित है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि फिल्म बनाते समय मूल नाटक की भावना और संदेश बरकरार रहे। फिल्म का मुख्य संदेश यही है कि इंसान को धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी इंसानियत से पहचाना जाना चाहिए।
जावेद अख्तर बोले- धर्म नहीं, इंसानियत से होनी चाहिए पहचान
गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने कहा कि किसी भी समुदाय या शहर के सभी लोगों को एक जैसा मानना गलत सोच है। उनके अनुसार हर समाज में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग होते हैं। उन्होंने सांप्रदायिक सोच से ऊपर उठकर इंसानियत को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया।
शूटिंग का भावुक पल साझा कर भावुक हुईं शबाना आजमी
फिल्म की अभिनेत्री शबाना आजमी ने शूटिंग के दौरान का एक भावुक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि एक दृश्य में जब उनका किरदार अपमानित होता है और बाद में सनी देओल का किरदार उन्हें दुपट्टा ओढ़ाता है, तो उस पल उन्हें सुरक्षा और सम्मान का एहसास हुआ।
सनी देओल ने सुनाया विभाजन का पारिवारिक दर्द, करण ने बताया यादगार अनुभव
सनी देओल ने कहा कि उन्होंने विभाजन की कहानियां किताबों से ज्यादा अपने परिवार से सुनी हैं। उनके माता-पिता और दादा-दादी ने उस दौर की पीड़ा को करीब से देखा था। उन्होंने कहा कि कठिन समय में भी कई लोगों ने धर्म से ऊपर उठकर एक-दूसरे की मदद की थी। उनके बेटे करण देओल ने भी फिल्म में पिता के साथ काम करने को अपने करियर का यादगार अनुभव बताया।

