
पटना : बिहार में उच्च शिक्षा में सुधार के सरकारी दावों के विपरीत अधिकांश विश्वविद्यालयों की अकादमिक और प्रशासनिक व्यवस्था चरमराई हुई है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्य के सभी 15 विश्वविद्यालयों में प्रति-कुलपति (प्रो-वीसी) के पद खाली हैं। वहीं चार विश्वविद्यालयों में कुलपति (VC) के पद भी रिक्त हैं। इसके अलावा 10 विश्वविद्यालयों में वित्तीय सलाहकार (FA) और वित्तीय अधिकारी (FO) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कामचलाऊ व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है।
मगध विश्वविद्यालय, मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (आरा) और तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति नहीं हैं। इन संस्थानों में सेवा विस्तार पाए या अतिरिक्त प्रभार वाले कुलपति सीमित अधिकारों के तहत कार्य कर रहे हैं। इससे विश्वविद्यालयों में जवाबदेही, सुशासन और निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन को जो जानकारी दी है, उसके अनुसार पांच विश्वविद्यालयों में वित्तीय सलाहकार के पद खाली हैं। जबकि छह विश्वविद्यालयों में वित्तीय अधिकारी के पद रिक्त हैं। इन पदों पर भी अतिरिक्त प्रभार के सहारे काम चलाया जा रहा है। बिहार यूनिवर्सिटी एक्ट, 1976 के प्रावधानों के अनुसार प्रो-वीसी के जिम्मे स्नातक स्तर पर नामांकन, छात्र कल्याण, शैक्षणिक एवं परीक्षा संचालन और परीक्षाफल प्रकाशन जैसे महत्वपूर्ण कार्य होते हैं।
इसके अलावा कुलपति द्वारा सौंपे गए अन्य प्रशासनिक और अकादमिक कार्य भी उनके दायरे में आते हैं। फिलहाल प्रो-वीसी के पद खाली होने से ये सभी जिम्मेदारियां कुलपतियों को संभालनी पड़ रही हैं। एक कुलपति के अनुसार, जुगाड़ के सहारे अकादमिक, प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों का संचालन जोखिम भरा है, लेकिन मजबूरी है। प्रो-वीसी के अभाव का असर स्नातक परीक्षाओं के संचालन पर भी स्पष्ट रूप से दिख रहा है। बिहार लोक भवन से सेवा विस्तार पाए कुलपतियों को अकादमिक और प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ वित्तीय अधिकारों के उपयोग में भी सीमाएं हैं।
ऐसे में कई विश्वविद्यालयों में व्यवस्था ‘केयरटेकर’ मोड में चल रही है। रोचक तथ्य यह है कि तत्कालीन राज्यपाल एवं कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर और आरिफ मोहम्मद खां के कार्यकाल में प्रो-वीसी के पद लगातार खाली होते गए, लेकिन उन्हें भरा नहीं जा सका। इसी तरह जिन कुलपतियों का कार्यकाल समाप्त हुआ, उन्हें नीतिगत निर्णय लेने पर रोक के साथ सेवा विस्तार दे दिया गया। मगध विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही को सेवा विस्तार दिए जाने पर विरोध भी हुआ।
तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में कुलपति का कार्यकाल समाप्त होने पर बीएन मंडल विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. बिमलेंदु शेखर झा को अतिरिक्त प्रभार दिया गया। वहीं वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के प्रो. शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी और मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय के प्रो. आलमगीर को सेवा विस्तार दिया गया।
इन विश्वविद्यालयों में प्रो-वीसी के पद खाली
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, नालंदा खुला विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, जयप्रकाश विश्वविद्यालय में प्रोवीसी के पद खाली हैं।
इसी तरह बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय (दरभंगा), पूर्णिया विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, बीएन मंडल विश्वविद्यालय और तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में प्रो-वीसी का पद रिक्त पड़ा है।

