
अवैध घुसपैठियों पर केंद्र सरकार की सख्ती का झारखंड में भी हो पालन
रांची : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा अवैध घुसपैठियों की पहचान और कार्रवाई के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश प्रकाश प्रभात नवेलकर के नेतृत्व में उच्च स्तरीय कमेटी गठित किया जाना राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। यह स्पष्ट संकेत है कि केंद्र सरकार देश की आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं करने वाली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन घुसपैठियों के कारण जनजातियों की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
प्रतुल शाह देव ने कहा कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी स्पष्ट कहा है कि अवैध मुस्लिम घुसपैठियों के लिए डिटेंशन सेंटर बनाए जाएंगे। ऐसे में झारखंड सरकार को भी इस गंभीर विषय पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि झारखंड के सीमावर्ती जिले-पाकुड़, जामताड़ा, दुमका और साहिबगंज-लंबे समय से अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ की समस्या से प्रभावित रहे हैं। अब जबकि पश्चिम बंगाल में कार्रवाई की आशंका बढ़ रही है, बड़ी संख्या में घुसपैठिए झारखंड की ओर भाग रहे हैं।
प्रतुल शाह देव ने कहा कि झारखंड अवैध घुसपैठियों का “सेफ जोन” बनता जा रहा है, क्योंकि आसपास के अधिकांश सीमावर्ती राज्यों में भाजपा की सरकार है और वहां सख्त निगरानी एवं कार्रवाई हो रही है।प्रतुल ने कहा 1951 और 2011 के बीच जनगणना की तुलना से यह स्पष्ट हो जाता है कि संथाल परगना में इन 60 वर्षों में आदिवासियों की जनसंख्या 16% घट गई और मुसलमानों की जनसंख्या 14% बढ़ गई। पश्चिम बंगाल से भागने पर इन सीमावर्ती जिलों में हेमंत सरकार के ढुलमुल रवैया के कारण अवैध घुसपैठियों की बाढ़ आने की संभावना है। घुसपैठियों को लगता है कि झारखंड में हेमंत सरकार की तुष्टिकरण की नीतियों के कारण उन्हें यहां राजनीतिक संरक्षण मिल जाएगा।
प्रतुल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि सीमावर्ती जिलों में तत्काल डिटेंशन सेंटर स्थापित किए जाएं तथा अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।प्रतुल शाह देव ने कहा कि इंडियन फॉरेनर्स एक्ट की संबंधित धाराओं के अनुसार किसी भी संदिग्ध विदेशी नागरिक की पहचान और सत्यापन की जिम्मेदारी जिला दंडाधिकारी के पास होती है। इसलिए राज्य सरकार को सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देकर व्यापक सत्यापन अभियान चलाना चाहिए।उन्होंने कहा कि यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि झारखंड की सामाजिक संरचना, स्थानीय संसाधनों, रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर मुद्दा है।भाजपा इस विषय पर जनता की आवाज बनकर लगातार संघर्ष करती रहेगी।

