बोकारो वन भूमि घोटाला : सीआईडी ने जांच धीमी रखी, ईडी ने 500 करोड़ का घोटाला पकड़ा : प्रतुल शाहदेव

बोकारो वन भूमि घोटाले में ईडी ने 500 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा किया, प्रतुल शाहदेव ने सीआईडी जांच पर सवाल उठाए, संगठित भ्रष्टाचार और साजिश का आरोप।

Razi Ahmad
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Bokaro Land Scam : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि बोकारो वन भूमि घोटाले में सामने आ रहे तथ्य झारखंड में व्याप्त संगठित भ्रष्टाचार की गहराई और गंभीरता को उजागर करते हैं।ईडी की ओर से दायर हलफनामे में 500 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा होना यह साबित करता है कि यह कोई साधारण अनियमितता नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित आर्थिक अपराध है।

प्रतुल ने कहा कि शुरुआत में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई, फिर जांच सीआईडी को सौंपी गई। लेकिन सीआईडी की जांच की रफ्तार इतनी धीमी और सीमित रही कि वह महीनों में केवल राजबीर कंस्ट्रक्शन के 3-4 करोड़ रुपये के लेन देन तक ही पहुंच सकी। इसके विपरीत, ईडी ने बेहद कम समय में पूरे नेटवर्क को उजागर करते हुए 500 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश कर दिया।

इससे स्पष्ट है कि राज्य की एजेंसियों का उपयोग सच्चाई को दबाने और असली दोषियों को बचाने के लिए किया जा रहा था।ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि शेल कंपनियों और रसूखदार खरीदारों के माध्यम से वन भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त की गई।इस पूरे खेल में कई स्तरों पर संगठित गिरोह सक्रिय था, जिसमें बिचौलिये, अधिकारी और प्रभावशाली लोग शामिल थे।

प्रतुल ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री श्री रामेश्वर उरांव जी स्वयं विधानसभा में कह चुके हैं कि जिन मामलों को सरकार लटकाना या भटकाना चाहती है, उन्हें एसीबी और सीआईडी के हवाले कर दिया जाता है।

बोकारो घोटाले में यह बात पूरी तरह सच साबित होती दिख रही है।सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि 500 करोड़ के इस महाघोटाले में जांच का दायरा केवल निचले स्तर के अधिकारियों—जैसे सीओ—तक ही क्यों सीमित किया जा रहा है? क्या इतने बड़े घोटाले में उच्च अधिकारी, राजनीतिक संरक्षण और सत्ता से जुड़े लोग शामिल नहीं हैं? अगर नहीं, तो उन्हें बचाने की इतनी कोशिश क्यों हो रही है? झारखंड में आज भ्रष्टाचार हर दिन नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। बोकारो वन भूमि घोटाला सिर्फ एक उदाहरण है—यह सरकार की नीयत, नीति और प्रशासनिक विफलता का आईना है।

Share This Article
रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।