
Ranchi Education News : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के बीच समन्वय की कमी का असर अब छात्रों और अभिभावकों पर दिखने लगा है। रांची में नौवीं कक्षा के करीब 15 हजार छात्रों द्वारा खरीदी गई करीब 7.5 करोड़ रुपये की किताबें और रेफरेंस बुक्स सिलेबस में बदलाव के बाद बेकार हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नामांकन लेने वाले छात्रों ने पहले ही किताबें खरीद ली थीं, लेकिन बाद में CBSE ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत 9वीं के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव कर दिया। इससे पहले खरीदी गई कई किताबें अब नए पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं रहीं।
हर छात्र पर औसतन 5 से 6 हजार रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है, क्योंकि अब नई किताबें खरीदनी पड़ सकती हैं। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों ने सत्र शुरू होने के करीब डेढ़ महीने बाद सिलेबस बदलने की जानकारी दी, तब तक अधिकांश परिवार किताबें खरीद चुके थे।
स्थिति और जटिल इसलिए हो गई है क्योंकि बदले हुए सिलेबस की नई किताबें अभी तक बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कई छात्र मोबाइल, लैपटॉप और पीडीएफ के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जिन परिवारों के पास पर्याप्त डिजिटल संसाधन नहीं हैं, उनके लिए यह परेशानी और बढ़ गई है।
CBSE ने नई शिक्षा नीति के तहत विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए इसे अधिक कौशल-आधारित और व्यावहारिक बनाने की बात कही है। हालांकि समय पर नई किताबें उपलब्ध नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है।

