
Jharkhand High Court : रांची नगर निगम में भवन नक्शा स्वीकृति से जुड़े मामले में झारखण्ड उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि भवन नक्शा पास करने का काम प्रतिनियुक्ति पर आए कार्यपालक अभियंताओं (ईई) की बजाय नियमित रूप से पदस्थापित असिस्टेंट टाउन प्लानर से कराया जाना चाहिए।
यह टिप्पणी जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने भवन नक्शा स्वीकृति से जुड़े अवमानना मामले की सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने कहा कि असिस्टेंट टाउन प्लानर तकनीकी रूप से अधिक सक्षम होते हैं, क्योंकि उन्होंने संबंधित विषय में विशेष प्रशिक्षण और अध्ययन किया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि भवन नक्शा स्वीकृति जैसे तकनीकी कार्य में विशेषज्ञता रखने वाले अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले से संबंधित लंबित अपील संख्या 181/2025 का प्रभाव वर्तमान सुनवाई पर पड़ सकता है।
मामले में रांची नगर निगम के नगर आयुक्त सशरीर अदालत में उपस्थित हुए और कोर्ट से आग्रह किया कि लंबित अपील की सुनवाई 16 जून को तय है, इसलिए उसके परिणाम की प्रतीक्षा की जाए। कोर्ट ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और नगर निगम को अतिरिक्त समय दिया तथा अगली सुनवाई 29 जून निर्धारित की।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि पूर्व आदेशों को लेकर कुछ भ्रम था, जो अब स्पष्ट हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार योग्य अधिकारियों की नियुक्ति और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नई नियमावली तैयार करेगी।
गौरतलब है कि यह मामला याचिकाकर्ता गौरव कुमार बेसरा द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है, जिस पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।

